चंपावत। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष को लेकर चंपावत की सियासत गरमा गई है। “सबका विकास पार्टी” के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र उत्तराखंडी ने इस कोष के वितरण में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए सीधे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उन्होंने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत 31 मार्च 2020 से 31 मार्च 2026 तक चंपावत जिले में इस कोष से किन लोगों को, किस आधार पर और कितनी धनराशि वितरित की गई—इसकी विस्तृत जानकारी मांगी है। माना जा रहा है कि यह आरटीआई आने वाले दिनों में कई चौंकाने वाले खुलासों का कारण बन सकती है।
हल्द्वानी में किसान मंच द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मॉडल जिले के रूप में प्रस्तुत किए जा रहे चंपावत में पुष्कर सिंह धामी की ओर से दी गई राहत सहायता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि यह कोष जरूरतमंदों की मदद के लिए है, लेकिन कई मामलों में अपात्र लोगों को लाखों रुपये देने के आरोप सामने आए हैं।
वक्ताओं ने यह भी दावा किया कि जहां प्रभावशाली लोगों को भारी भरकम सहायता मिली, वहीं असली जरूरतमंदों को मात्र 2 से 4 हजार रुपये देकर खानापूर्ति कर दी गई। इसे उन्होंने “राहत के नाम पर पक्षपात” करार दिया।
डॉ. उत्तराखंडी ने दो टूक कहा कि आरटीआई से पूरी सच्चाई सामने आने के बाद इस मुद्दे को प्रदेशभर में उठाया जाएगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि आगामी विधानसभा चुनाव में इसे एक बड़ा चुनावी हथियार बनाया जाएगा, जिससे सरकार को जवाब देना मुश्किल हो सकता है।
फोटो_ डॉ. हरीश शर्मा उर्फ नरेंद्र उत्तराखंडी।
