चंपावत: सीनियर सिटीजन विक पर विषेश_

Share This Post

101 साल की उम्र में भी फिट, सक्रिय और निरोगी जानिए लोहाघाट के ‘मासाहब’ मोती सिंह मेहता की लंबी उम्र का रहस्य।

सादगी, अनुशासन, सकारात्मक सोच और प्रकृति से जुड़ाव ने बनाया स्वस्थ जीवन का प्रेरणास्रोत
रोज 5 किलोमीटर की सैर, संयमित भोजन और सेवा भाव से आज भी युवाओं जैसी ऊर्जा।


लोहाघाट। आज की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में जहां कम उम्र में ही लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, वहीं लोहाघाट के ठाडाढुंगा मोहल्ले निवासी 101 वर्षीय मोती सिंह मेहता ‘मासाहब’ स्वस्थ, सक्रिय और अनुशासित जीवनशैली की जीवंत मिसाल बने हुए हैं। सीनियर सिटीजन वीक पर विशेष बातचीत में मासाहब ने अपने दीर्घ और निरोग जीवन के ऐसे सूत्र बताए, जो हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि 101 वर्ष की आयु में भी वह प्रतिदिन करीब 5 किलोमीटर पैदल सैर करते हैं और किसी गंभीर बीमारी से दूर हैं। पूर्व प्रधानाचार्य रहे मोती सिंह मेहता बताते हैं कि मनुष्य यदि प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन जिए, तो वही सबसे बड़ा “आरोग्य कवच” बन जाता है। उनका मानना है कि सकारात्मक सोच, दूसरों का भला चाहना, हमेशा प्रसन्न रहना और अनुशासित दिनचर्या ही स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है।
मासाहब के अनुसार सुबह जल्दी उठना, नियमित भ्रमण, समय का सम्मान, नशे से दूरी, कम भोजन और निरंतर सक्रिय रहना शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है। वह कहते हैं कि “भूख से कम भोजन करना और कुदरत की चीजों को अपनाना ही लंबी उम्र का असली रहस्य है।” उन्होंने भोजन में नमक, चीनी और तली-भुनी चीजों का कम प्रयोग करने तथा हरी सब्जियों और किचन गार्डन को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। उनका मानना है कि अच्छे विचार ही परिवार को जोड़े रखते हैं और इंसान को अंत तक मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखते हैं। मोती सिंह मेहता कहते हैं कि मनुष्य को अपनी उम्र, अतीत और स्वयं की अधिक प्रशंसा में नहीं उलझना चाहिए। दूसरों की मदद करें, लेकिन कठिन समय के लिए बचत भी जरूरी रखें। हर व्यक्ति से आत्मीय व्यवहार करें और ईश्वर की लीला पर विश्वास बनाए रखें।
उन्होंने युवाओं से धार्मिक ग्रंथ पढ़ने, सुनने और बच्चों को संस्कारों से जोड़ने की अपील करते हुए कहा कि परिवार को ऐसी विरासत देकर जाएं, जिसे आने वाली पीढ़ियां गर्व से आगे बढ़ाएं। मासाहब का मानना है कि “जिस घर में माता-पिता खुश रहते हैं, वह घर स्वर्ग के समान होता है। दूसरों को दुख देने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता, यही प्रकृति और विधि का विधान है।” मासाहब जूनियर हाईस्कूल फोरती के प्रधानाध्यापक एवं योगाचार्य लक्ष्मण सिंह मेहता के पिताश्री है।


फोटो – 101 बसंत देख चुके लोहाघाट निवासी मोती सिंह मेहता ‘मासाहब’, जो आज भी अनुशासित जीवनशैली और सकारात्मक सोच से युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।


Share This Post