

लोहाघाट। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बना शौचालय आपदा की भेंट चढ़ गया, लेकिन दो महीने बाद भी गरीब परिवार को राहत नहीं मिल सकी। लोहाघाट विकासखंड के गायल गांव की कमला देवी का परिवार अब 18 वर्षीय बेटी समेत खुले में शौच जाने को मजबूर है। शिकायत के बाद अधिकारियों ने जानकारी तो ली, लेकिन मौके पर जांच और समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
कमला देवी को करीब दो वर्ष पहले स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय की सुविधा मिली थी। भारी बारिश के दौरान शौचालय का आधा हिस्सा गड्ढे समेत बह गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार अपने स्तर से इसका पुनर्निर्माण नहीं करा सका।
पीड़ित कमला देवी ने 8 जून 2026 को जिलाधिकारी से मदद की गुहार लगाई थी। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद अधिकारियों ने दो बार फोन कर मामले की जानकारी ली, लेकिन मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच करने और समाधान निकालने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
बाद में शिकायत को यह कहकर निस्तारित कर दिया गया कि परिवार को पहले ही शौचालय योजना का लाभ मिल चुका है और नियमानुसार दोबारा शौचालय नहीं दिया जा सकता। लेकिन सवाल यह है कि जब सरकारी योजना से बना शौचालय प्राकृतिक आपदा में बह गया तो गरीब परिवार आखिर जाए तो कहां जाए?
अब 18 वर्षीय बेटी समेत पूरा परिवार खुले में शौच के लिए जंगल की ओर जाने को मजबूर है। जंगल क्षेत्र होने के कारण जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में परिवार की सुरक्षा और गरिमा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
करीब 35 हजार रुपये की सहायता से शौचालय का पुनर्निर्माण संभव हो सकता है, लेकिन गरीब परिवार दो महीने से सरकारी दफ्तरों और शिकायत प्रक्रिया के भरोसे बैठा है।
एक ओर सरकार स्वच्छता अभियान और खुले में शौच मुक्त भारत के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर गायल गांव का यह परिवार मूलभूत सुविधा के लिए परेशान है। जरूरत है कि प्रशासन नियमों का हवाला देकर मामला बंद करने के बजाय मौके की वास्तविक स्थिति की जांच करे और वैधानिक प्रावधानों के तहत इस गरीब परिवार को राहत देने का रास्ता निकाले।
आखिर सवाल सिर्फ एक शौचालय का नहीं, बल्कि एक गरीब परिवार की स्वच्छता, सुरक्षा और सम्मान का है।
फोटो_तस्वीर में आपदा के बाद क्षतिग्रस्त और बहा हुआ शौचालय।





