चंपावत: देवीधुरा के श्री बाराही संस्कृत महाविद्यालय को आवासीय विद्यालय बनाने की उठी मांग, विद्वानों ने बताया समय की जरूरत।

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देवीधुरा/लोहाघाट। उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कार प्रदान करने के उद्देश्य से आवासीय संस्कृत विद्यालयों की मांग जोर पकड़ने लगी है। संस्कृत विद्वानों का कहना है कि नवोदय विद्यालयों की तर्ज पर प्रदेश में ऐसे संस्थान स्थापित किए जाने चाहिए, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जा सके।

संस्कृत और वेदों के विद्वान डॉ. कीर्ति वल्लभ सक्टा ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के एकमात्र श्री बाराही संस्कृत महाविद्यालय, देवीधुरा को लंबे समय से आवासीय विद्यालय का स्वरूप देने की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि यदि इस संस्थान को आवासीय विद्यालय के रूप में विकसित किया जाता है तो इससे प्रदेश के साथ-साथ देशभर के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी अनेक सामाजिक और वैचारिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में संस्कृत शिक्षा विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिकता, कर्तव्यबोध और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डॉ. सक्टा ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं की आत्मा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर मिलता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार इस दिशा में सकारात्मक पहल करेगी। उनका मानना है कि यदि उत्तराखंड में आवासीय संस्कृत विद्यालय स्थापित किए जाते हैं तो देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी यहां अध्ययन के लिए आएंगे और प्रदेश संस्कृत शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

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रोजगार की दृष्टि से भी उपयोगी है संस्कृत।

विशेषज्ञों का कहना है कि संस्कृत का क्षेत्र केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। कर्मकांड, ज्योतिष, वेद और पुराणों के अध्ययन, कथा वाचन, अध्यापन तथा सेना और अर्धसैनिक बलों में बटालियन पंडित जैसे अनेक क्षेत्रों में संस्कृत के विद्वानों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व चुनाव आयुक्त डॉ. अनूप पांडे ने कहा कि संस्कृत के विद्वानों की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है। वहीं सनातन धर्म प्रचारक राजी शर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा युवाओं को सम्मानजनक रोजगार और वैश्विक पहचान दिलाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है।

फोटो_ देवीधुरा स्थित श्री बाराही संस्कृत महाविद्यालय।


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