चंपावत। तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच गुटखा और पान मसाला युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा है कि यह आदत धीरे-धीरे शरीर को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रही है। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह बसेड़ा ने कहा कि गुटखा केवल नशा नहीं, बल्कि शरीर के लिए धीमे ज़हर की तरह काम करता है।
उन्होंने बताया कि गुटखे के लगातार सेवन से मुंह के अंदर कोलेजन का असामान्य निर्माण होने लगता है। इसके कारण मुंह की अंदरूनी त्वचा अपनी लचक खोने लगती है और धीरे-धीरे कठोर हो जाती है। इसका असर व्यक्ति की खाने-पीने की क्षमता पर भी पड़ता है और कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि मुंह पूरी तरह खुलना भी बंद हो जाता है।
डॉ. बसेड़ा के अनुसार, गुटखे का लंबे समय तक सेवन करने से मुंह और गले के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा हृदय रोग, रक्त संचार में बाधा, आवाज़ में बदलाव और शरीर के अन्य अंगों पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गुटखे की लत से छुटकारा पाने के लिए सबसे जरूरी चीज़ दृढ़ इच्छाशक्ति है। तलब लगने पर लौंग, इलायची और काली मिर्च का सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा अदरक, नींबू और काले नमक का मिश्रण भी इस आदत को छोड़ने में सहायक साबित हो सकता है।
फोटो_ जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह बसेड़ा ने लोगों से गुटखा और पान मसाले के सेवन से बचने की अपील की।
चंपावत: गुटखे की लत बन रही जानलेवा, युवाओं में तेजी से बढ़ रहा मुंह के कैंसर का खतरा!
