चंपावत: पूर्णागिरि मेले में नेपाली श्रद्धालुओं की बढ़ी आमद—यात्रा ने पकड़ी रफ्तार।

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वैशाखी के बाद नेपाल से उमड़ रही आस्था की भीड़, शारदा घाट पर जल पुलिस ने बचाई 13 वर्षीय बच्चे की जान।

टनकपुर/चंपावत। प्रसिद्ध पूर्णागिरि मेले में अब पड़ोसी देश नेपाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला तेज हो गया है। बताया गया है कि वैशाखी के बाद से ही नेपाली तीर्थयात्री मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए यहां पहुंचने लगते हैं। वहीं मैदानी क्षेत्रों में गेहूं की कटाई का असर मेले में साफ दिखाई दे रहा है, जिससे स्थानीय और अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कुछ कमी आई है। मेला मजिस्ट्रेट डॉ. ललित मोहन तिवारी के अनुसार पिछले चार दिनों से श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम हुई है, हालांकि इस कमी की भरपाई नेपाली श्रद्धालु कर रहे हैं।
मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मेला क्षेत्र में वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए पुलिस और आरटीओ द्वारा लिए गए निर्णय का असर भी अब नजर आने लगा है।

उधर शारदा घाट पर आज एक बड़ा हादसा टल गया, जब लखनऊ का 13 वर्षीय बच्चा नदी में डूबने लगा। मौके पर तैनात जल पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को सुरक्षित बचा लिया। मेला प्रशासन द्वारा शारदा घाट, बूम घाट और बनबसा में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, जहां जल पुलिस की तैनाती की गई है। इनमें शारदा घाट और बूम घाट पर सबसे अधिक भीड़ का दबाव देखा जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि कई नेपाली श्रद्धालु अपने साथ भोजन बनाने का सामान भी लेकर आते हैं। उनका मानना है कि वे मां पूर्णागिरि के दर्शन से पहले शुद्धता बनाए रखना चाहते हैं। परंपरा के अनुसार, मां पूर्णागिरि के दर्शन के बाद ब्रह्मदेव में सिद्ध बाबा के दर्शन करने के पश्चात ही यात्रा पूर्ण मानी जाती है।


फोटो  पूर्णागिरि मेले में नेपाल से आए श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए।


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