चंपावत: हरेला पर पहाड़ों के गांवों में महकी आयुर्वेद की खुशबू, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से बसेंगी औषध वाटिकाएं।

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आयुष विभाग की पहल, जनपदभर में 500 औषधीय पौधों का रोपण, गांव-गांव तक पहुंचेगा अभियान।

चंपावत। हरेला पर्व के अवसर पर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत जनपदभर में वृहद पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और आयुर्वेद के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह के निर्देशन में सभी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ‘मेरा गांव–मेरी वाटिका’ थीम पर औषध वाटिकाओं की स्थापना की गई।
अभियान के तहत जनपदभर में करीब 500 औषधीय एवं पर्यावरणीय महत्व के पौधे लगाए गए। इनमें हरितकी, विभीतकी, आंवला (त्रिफला), बेल, सहजन (मोरिंगा) और पारिजात (हरसिंगार) जैसे औषधीय पौधे शामिल रहे। साथ ही चिकित्सालय परिसरों और आसपास के गांवों में त्रिफला वाटिकाएं विकसित कर औषधीय पौधों के संरक्षण की पहल की गई।

जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह ने कहा कि हरेला पर्व पर शुरू किया गया यह अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। विभाग चरणबद्ध तरीके से जनपद के अधिक से अधिक गांवों में औषधीय पौधों का रोपण कर औषध वाटिकाओं का विस्तार करेगा। उन्होंने कहा कि उद्देश्य लोगों को औषधीय पौधों के महत्व से जोड़ना, आयुर्वेद को घर-घर तक पहुंचाना और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाना है। उनका कहना था कि यदि हर परिवार एक औषधीय पौधे के संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में चंपावत औषधीय हरियाली और प्रकृति संरक्षण की मिसाल बन सकता है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, ग्रामीणों तथा आयुष विभाग के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने पौधों की देखभाल और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया।

फोटो/व्यूजल _हरेला पर्व पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत चंपावत में औषधीय पौधों का रोपण करते आयुष विभाग के अधिकारी, कर्मचारी एवं स्थानीय ग्रामीण।


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