चंपावत। जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा विकसित किए जा रहे जिम कॉर्बेट हेरिटेज फॉरेस्ट ट्रेल अब सुरक्षा व्यवस्थाओं के अभाव में सवालों के घेरे में हैं। जिला मुख्यालय स्थित नवनिर्मित इको टूरिज्म एवं हेरिटेज ट्रेल पर पर्यटक अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैकिंग करने को मजबूर हैं।
राज्य सरकार ने चंपावत में तल्लादेश ट्रेल, बूम-खलढूंगा-चुका-टाक ट्रेल, पनार वैली ट्रेल, देवीधुरा-धूनाघाट ट्रेल और चल्थी-दुर्गापीपल-लधिया वैली ट्रेल समेत छह कॉर्बेट ट्रेल विकसित किए हैं। इनका उद्देश्य प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देना है, लेकिन जिला मुख्यालय का हेरिटेज ट्रेल सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण चिंता का विषय बन गया है।
ट्रेल का अधिकांश हिस्सा खड़ी ढलानों, रेतीली मिट्टी और शिलायुक्त पहाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरता है। शुरुआत में कुछ स्थानों पर रेलिंग लगाई गई है, लेकिन अधिकतर रास्ता बेहद संकरा है और वहां सुरक्षा रेलिंग नहीं है। ऐसे में जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
ट्रेल का अंतिम पड़ाव गौड़ी नदी के किनारे है, जहां विशाल चट्टानों पर चढ़कर पर्यटक फोटो और वीडियो बनाते नजर आते हैं। नदी के तेज बहाव से बने गहरे जलकुंड और फिसलन भरी शिलाएं लगातार खतरा बनी हुई हैं। बावजूद इसके मौके पर न तो कोई सुरक्षा कर्मी तैनात है और न ही पर्यटकों को सतर्क करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गौड़ी नदी में पहले भी कई लोग तेज बहाव की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी है। यदि समय रहते रेलिंग, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और अन्य आवश्यक इंतजाम नहीं किए गए तो यह पर्यटन स्थल कभी भी किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।
