चंपावत: जब थम गई थीं सांसें… सेना के मेजर जनरल के सीपीआर और पुलिस की फुर्ती ने बचाई युवक की जान।

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चंपावत। सूखीढांग क्षेत्र में 8 जुलाई को हुआ सड़क हादसा कुछ ही पलों में एक दर्दनाक त्रासदी में बदल सकता था, लेकिन भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी की सूझबूझ और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने मौत के मुंह में जा चुके युवक को नई जिंदगी दे दी। सड़क पर अचेत पड़े युवक को देखकर आसपास मौजूद लोग उसे मृत मान चुके थे, लेकिन उसी समय वहां से गुजर रहे भारतीय सेना के मेजर जनरल बी.के. पात्रा ने तत्काल स्थिति को समझा और बिना समय गंवाए सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया। कुछ मिनटों की अथक कोशिश के बाद युवक की थमी हुई सांसें फिर चलने लगीं। इसके बाद पुलिस ने तत्काल घायल को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद युवक सड़क पर पूरी तरह बेसुध पड़ा था। उसके शरीर में कोई हलचल नहीं थी और सांसें भी महसूस नहीं हो रही थीं। मौके पर मौजूद अधिकांश लोगों ने उसे मृत समझ लिया था। तभी वहां से गुजर रहे मेजर जनरल बी.के. पात्रा की नजर युवक पर पड़ी। उन्होंने तुरंत अपना वाहन रुकवाया, युवक की नाड़ी और श्वास की जांच की और बिना एक पल गंवाए बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) के तहत सीपीआर देना शुरू कर दिया।
लगातार कई मिनट तक किए गए प्रयास के बाद युवक के शरीर में हलचल हुई और उसकी सांसें दोबारा चलने लगीं। यह देखकर घटनास्थल पर मौजूद लोग हैरान रह गए। जिस युवक को कुछ मिनट पहले तक मृत समझा जा रहा था, वह फिर से जिंदगी की ओर लौट चुका था।
इसी बीच सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सेना के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाते हुए घायल युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार हादसे के तुरंत बाद दिया गया सीपीआर युवक के लिए जीवनदान साबित हुआ। यदि कुछ मिनट और देर हो जाती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की जान बचने की कहानी नहीं, बल्कि यह बताती है कि सड़क दुर्घटनाओं में ‘गोल्डन ऑवर’ कितना महत्वपूर्ण होता है। सही समय पर दिया गया प्राथमिक उपचार और राहत एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई कई बार मौत को भी मात दे सकती है।
सूखीढांग की यह घटना भारतीय सेना की मानवीय संवेदनशीलता, मेजर जनरल बी.के. पात्रा की तत्परता और चंपावत पुलिस की सक्रिय कार्यशैली का प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है। यह आम नागरिकों के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीक का ज्ञान किसी भी व्यक्ति के लिए अमूल्य हो सकता है। सही समय पर उठाया गया एक कदम किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है।

फोट_ सड़क हादसे में घायल युवक को सीपीआर देने से पहले उसकी स्थिति की जांच करते भारतीय सेना के जवान एवं पुलिसकर्मी।

सूखीढांग में सड़क हादसे के बाद अचेत युवक को सीपीआर देकर उसकी जान बचाते भारतीय सेना के मेजर जनरल बी.के. पात्रा, साथ में मौजूद पुलिस व स्थानीय लोग।

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