चंपावत: नौकरी छोड़ खेती में रचा इतिहास, अब दूसरे किसानों के लिए बने मिसाल।

Share This Post

आधुनिक खेती से बदल रही युवाओं की सोच।

‘किसान की कहानी, किसान की जुबानी’ कार्यक्रम में सफल किसानों ने खोले तरक्की के राज, खेती को बताया सम्मान और समृद्धि का रास्ता

लोहाघाट। जिस दौर में गांवों से पलायन लगातार बढ़ रहा है, उसी दौर में चंपावत के कुछ प्रगतिशील किसान अपनी मेहनत और नवाचार से यह साबित कर रहे हैं कि यदि खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो यही सबसे बड़ा रोजगार बन सकती है। उद्यान विभाग के “किसान की कहानी, किसान की जुबानी” कार्यक्रम में ऐसे ही किसानों की प्रेरक कहानियां सुनकर दर्जनों किसानों ने आधुनिक खेती की नई तकनीकों को अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के तहत डूंगरी फर्त्याल के प्रगतिशील किसान रघुवर मुरारी तथा बूंगा फर्त्याल के किसान दंपति राकेश उपाध्याय और हेमा उपाध्याय के खेतों में किसान संवाद एवं भ्रमण आयोजित किया गया। किसानों ने पॉलीहाउस, जैविक खेती, फल एवं सब्जी उत्पादन, डेयरी, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन के सफल मॉडलों का अवलोकन कर खेती को व्यवसायिक रूप देने की बारीकियां सीखीं।
रघुवर मुरारी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि परंपरागत खेती को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर उन्होंने इसे लाभ का सौदा बना दिया। वहीं उच्च शिक्षित राकेश उपाध्याय और हेमा उपाध्याय ने नौकरी की राह छोड़ गांव में आधुनिक कृषि को अपनाकर ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुका है। तीन एकड़ भूमि पर विकसित उनका बहुउद्देश्यीय कृषि मॉडल रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहा है।
कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित हेमा उपाध्याय ने कहा कि यदि किसान तकनीक और नवाचार के साथ आगे बढ़ें तो पहाड़ की खेती भी लाखों की आय का स्रोत बन सकती है। उनके डेयरी फार्म से गर्मियों में प्रतिदिन लगभग एक क्विंटल दूध का उत्पादन होता है, जबकि पॉलीहाउस और बागवानी से भी अच्छी आमदनी हो रही है।
उद्यान विभाग के एडीओ आशीष रंजन खर्कवाल की पहल पर शुरू हुआ यह कार्यक्रम किसानों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. रजनी पंत ने भी किसानों को वैज्ञानिक खेती, जैविक उत्पादन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताए।
राकेश उपाध्याय ने कहा कि ऐसे किसान संवाद कार्यक्रम गांव-गांव में होने चाहिए, क्योंकि किसानों की सफलता की कहानी ही दूसरे किसानों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनती है।

बॉक्स खबर

आधुनिक खेती में अव्वल, लेकिन 100 मीटर सड़क के लिए अब भी संघर्ष।

आधुनिक खेती का सफल मॉडल खड़ा कर चुके बूंगा फर्त्याल के प्रगतिशील किसान राकेश उपाध्याय आज भी अपने खेत तक पहुंचने के लिए मात्र 100 मीटर सड़क की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। सड़क न होने से कृषि उत्पादों की ढुलाई, डेयरी संचालन और होम-स्टे तक पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित होती है। उनका कहना है कि यदि यह छोटी सी सड़क बन जाए तो खेती और ग्रामीण पर्यटन दोनों को नई गति मिलेगी। उन्होंने प्रशासन से वर्षों पुरानी इस समस्या का शीघ्र समाधान करने की अपील की।

फोटो_’किसान की कहानी, किसान की जुबानी’ कार्यक्रम के दौरान बूंगा फर्त्याल में आधुनिक खेती, पॉलीहाउस और बागवानी मॉडल का निरीक्षण करते किसान।


Share This Post