चंपावत: “भाजपा और कांग्रेस ने उत्तराखंड की मूल भावना से किया समझौता”, बोले यूकेडी जिला महामंत्री रमेश बिष्ट।

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मुंबई से लौटकर अपनी माटी से जुड़े रमेश बिष्ट बोले— पलायन, भ्रष्टाचार और अव्यवस्थित विकास ने पहाड़ की पहचान को पहुंचाया नुकसान।

लोहाघाट। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के नवनियुक्त जिला महामंत्री रमेश बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का सपना जिन आदर्शों और मूल भावनाओं के साथ देखा गया था, वह आज भी अधूरा है। उनका आरोप है कि भाजपा और कांग्रेस की नीतियों के कारण शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पहाड़ों से लगातार पलायन हो रहा है और लोग अपनी माटी छोड़कर महानगरों की भीड़ का हिस्सा बनने को मजबूर हैं।
निकटवर्ती डैसली गांव निवासी रमेश बिष्ट लंबे समय तक मुंबई में रहे। उन्होंने कहा कि दूर रहते हुए उन्हें लगता था कि उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा होगा, लेकिन जब वह अपने गांव लौटे तो वास्तविक स्थिति कुछ और ही मिली। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर भारी धनराशि खर्च होने के बावजूद दूरदर्शी योजना के अभाव में आम लोगों की अपेक्षाएं पूरी नहीं हो सकीं। इससे कुछ लोगों को लाभ जरूर मिला, लेकिन ग्रामीण समाज की मूल समस्याएं आज भी जस की तस हैं।
रमेश बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड में विकसित हुई नवधनाढ्य संस्कृति और बढ़ते भ्रष्टाचार ने राज्य की राजनीति को प्रभावित किया है। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर हुए भ्रष्टाचार ने ऐसे लोगों को राजनीतिक ताकत दी, जिनका जनता की मूल समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान जिन उद्देश्यों को लेकर संघर्ष किया गया था, उन्हें फिर से जीवित करने की आवश्यकता है। इसके लिए उत्तराखंड क्रांति दल को एक नए जनआंदोलन की शुरुआत करनी होगी। उन्होंने कहा कि यूकेडी का उद्देश्य किसी दल से व्यक्तिगत विरोध नहीं, बल्कि उत्तराखंड की मूल भावना और पहाड़ के हितों की रक्षा करना है।
रमेश बिष्ट ने कहा, “हमारे लिए भाजपा और कांग्रेस में कोई विशेष अंतर नहीं है। उत्तराखंड की योजनाएं पहाड़ की जरूरतों को समझकर बननी चाहिए, न कि वातानुकूलित कमरों में बैठकर।” उन्होंने कहा कि भले ही आज यूकेडी की राजनीतिक ताकत सीमित दिखाई देती हो, लेकिन जनसमर्थन और विचारों की ताकत से बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि लोग उत्तराखंड की मूल सोच और क्षेत्रीय हितों के लिए एकजुट हुए तो भविष्य में यूकेडी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के कारण उत्तराखंड की जनसांख्यिकी, संस्कृति और प्राकृतिक स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। राज्य के विकास की दिशा को जनभावनाओं और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तय किए जाने की जरूरत है।

फोटो_ उत्तराखंड क्रांति दल के नवनियुक्त जिला महामंत्री रमेश बिष्ट।


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