चंपावत: शिविरों की चमक में दब गई बिनवाल गांव की बदहाली, यूकेडी का धामी सरकार पर तीखा हमला।

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पांच साल से बंद स्कूल, डॉक्टर विहीन अस्पताल, जर्जर सड़क और पलायन पर जवाब दे सरकार, सिर्फ शिविरों से नहीं बदलेंगे हालात।

चंपावत। सीमांत क्षेत्र बिनवाल गांव में आयोजित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ बहुउद्देशीय शिविर को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है। यूकेडी के चंपावत विधानसभा जिलाध्यक्ष दरवान सिंह रजवार ने आरोप लगाया कि सरकार शिविरों और प्रचार के जरिए विकास का दावा कर रही है, जबकि बिनवाल जैसे सीमांत गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
रजवार ने कहा कि जिस गांव में पिछले पांच वर्षों से प्राथमिक विद्यालय बंद हो, बच्चे जंगल पार कर दूसरे गांव पढ़ने जाएं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टर विहीन हो और इंटर कॉलेज में शिक्षकों के पद वर्षों से खाली पड़े हों, वहां विकास के दावे केवल कागजी साबित होते हैं।
उन्होंने रीठा साहिब-बिनवाल मोटर मार्ग की बदहाली को भी सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि हल्की बारिश में सड़क बंद हो जाती है और हर साल मार्ग क्षतिग्रस्त होता है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका।
यूकेडी ने पलायन के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए दावा किया कि कभी करीब 200 परिवारों वाला बिनवाल गांव अब घटकर महज 60 से 70 परिवारों तक रह गया है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार की अनदेखी ने सीमांत गांवों को खाली होने की कगार पर पहुंचा दिया है।
रजवार ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में “जन-जन की सरकार” बनना चाहती है तो उसे प्रचार और शिविरों से आगे बढ़कर सीमांत गांवों की जमीनी समस्याओं का स्थायी समाधान करना होगा। बंद स्कूल खोलने, अस्पतालों में डॉक्टर तैनात करने, सड़कों का स्थायी सुधार कराने और रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे ठोस कदम ही गांवों की तस्वीर बदल सकते हैं।

फोटो/व्यूजल_बिनवाल गांव की बदहाली को लेकर सरकार पर निशाना साधते यूकेडी के चंपावत विधानसभा जिलाध्यक्ष दरवान सिंह रजवार।


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