पाश्चात्य प्रभाव में तब्दील होती सनातनीय परंपराएं, रीति-रिवाज और संस्कार के लिए धर्माचार्यों से आगे आने की अपील।
चंपावत। श्रीबाराही शक्तिपीठ ट्रस्ट के पहले अध्यक्ष एवं वेद-पुराणों के ज्ञाता हीरा बल्लभ जोशी ने हिंदू समाज में तेजी से हो रहे सांस्कृतिक और सामाजिक बदलावों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में समाज अपनी जड़ों और परंपराओं से कटता जा रहा है, जो भविष्य के लिए गंभीर संकेत है। हीराबल्लभ जोशी ने कहा कि आज पारंपरिक वेश-भूषा और संस्कार धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। विवाहित महिलाओं में साड़ी, पल्लू, बिंदी, चूड़ी और मंगलसूत्र जैसे सुहाग के प्रतीकों का प्रचलन कम होता जा रहा है। वहीं शादी-विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर भी अब पारंपरिक रीति-रिवाजों की जगह “प्री-वेडिंग” और आधुनिक आयोजनों ने ले ली है।
उन्होंने जन्मदिन और विवाह जैसे आयोजनों के बदलते स्वरूप पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले ऐसे अवसरों पर भगवान मार्कण्य पूजन होता था, जबकि अब केक काटने की पश्चिमी परंपरा हावी हो गई है। बच्चों को मंदिरों, देवी-देवताओं और धार्मिक श्लोकों से जोड़ने की परंपरा भी कमजोर पड़ती जा रही है। यूं कहें कि खत्म ही हो चुकी है। जोशी ने कहा कि पहले जहां बच्चे बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते थे, आज वही स्थान “हेलो-हाय” ने ले लिया है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और स्थानीय बोली से भी दूर होती जा रही है, जबकि अंग्रेजी बोलने को ही गौरव समझा जा रहा है। संयुक्त परिवारों के विघटन पर भी उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि माता-पिता, जिन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए पूरा जीवन समर्पित किया, आज वही उन्हीं से उपेक्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता ए पृथ्वी के देवता से भी बढ़कर हैं और उनके आशीर्वाद एवं कृपा के घर, घर नहीं बल्कि “कब्रिस्तान” के समान हो जाता है। जोशी ने धर्माचार्यों और कथा वाचकों से अपील की कि वे खुलकर सामने आएं और समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का कार्य करें, ताकि आने वाली पीढ़ी भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को समझ सके।
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कौन हैं हीरा बल्लभ जोशी?
देवीधुरा के समीप वारी गांव के पुरोहित परिवार में जन्मे हीरा बल्लभ जोशी वेद, पुराण और उपनिषदों के गहन ज्ञाता हैं। वे क्षेत्र के पहले आइआरएस अधिकारी रहे हैं और रेलवे फ्रेट कॉरिडोर में महानिदेशक पद पर रहते हुए भारतीय रेल सेवा के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना जीवन सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया। वर्तमान में वे श्री बाराही शक्तिपीठ ट्रस्ट के पहले अध्यक्ष हैं और कई धार्मिक पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं, जिनकी देश-विदेश में मांग रही है। साथ ही उनके द्वारा बाराही धाम में नए भव्य मंदिर का जनसंयोग से निर्माण करने के लिए वह सामाजिक मुहिम का मजबूत हिस्सा बने हुए हैं।
फोटो – हीरा बल्लभ जोशी।
चंपावत: “संस्कृति से दूर होता हिंदू समाज एक चिंताजनक” विषय- हीरा बल्लभ जोशी का तीखा प्रहार।
