सबका विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश शर्मा का आरोप सूची में पारदर्शिता नहीं, मामला सूचना आयोग तक ले जाने की चेतावनी।
चंपावत। सबका विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश शर्मा (उर्फ नरेंद्र) ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत सहायता कोष के वितरण पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कोष से ऐसे लोगों को भी आर्थिक सहायता दी गई है जो पहले से ही सक्षम हैं, जबकि वास्तविक जरूरतमंदों को महज 5 से 10 हजार रुपये तक ही सीमित कर दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को लाखों रुपये तक की सहायता प्रदान की गई है। साथ ही आरोप लगाया कि लाभार्थियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। डॉ. शर्मा ने कहा कि कई नामों को अधूरा दिखाया गया है कहीं सिर्फ “अध्यक्ष” लिखा है तो कहीं किसी नेता की पत्नी के नाम सहायता जारी की गई, लेकिन संबंधित व्यक्ति की पूरी पहचान छिपाई गई है। उनका कहना है कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है ताकि वास्तविक लाभार्थियों की सच्चाई सामने न आ सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले को वे मुख्य सूचना आयोग तक ले जाएंगे और पूरी सूची को सार्वजनिक कराने की मांग करेंगे, ताकि लोगों को वास्तविकता का पता चल सके। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से कोई विरोध नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि राहत कोष की राशि केवल पात्र और जरूरतमंद लोगों तक ही पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि “मोटे मगरमच्छों” ने गरीबों का हक छीनकर व्यवस्था में गड़बड़ी की है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर उठाएगी और पारदर्शिता के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
चंपावत: सीएम राहत कोष पर उठे सवाल, “हकदारों की जगह अपात्रों को मिली मदद”।
