लोहाघाट। 3 जून। राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। टनकपुर डिपो की रोडवेज बस के ब्रेक फेल होने पर चालक ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 34 यात्रियों की जान बचा ली, लेकिन इस कोशिश में उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। जानकारी के अनुसार टनकपुर डिपो की बस संख्या यूके07पीए-3122 यात्रियों को धारचूला से टनकपुर लेकर जा रही थी। एमजे होटल के समीप अचानक रोडवेज बस का ब्रेक फेल हो गया। ढलान पर बस बेकाबू होकर तेज रफ्तार से दौड़ने लगी। सामने गहरी खाई और बस में सवार यात्रियों की जान का खतरा देखकर चालक बेनीराम थ्वाल (ग्राम बडोली) ने बस को सड़क किनारे पहाड़ी की दीवार से टकरा दिया। टक्कर से बस रुक गई और उसमें सवार सभी 34 यात्रियों की जान बच गई, लेकिन हादसे के दौरान चालक बेनीराम वाहन से बाहर जा गिरे और बस के पहिए की चपेट में आ गए। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। जेसीबी मशीन की सहायता से क्षतिग्रस्त बस को हटाकर चालक के शव को बाहर निकाला गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि चालक कुछ सेकंड भी देर करता तो बस सीधे गहरी खाई में गिर सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था। चालक के साहसिक निर्णय ने 34 परिवारों को उजड़ने से बचा लिया। हादसे के बाद क्षेत्रभर में चालक बेनीराम की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की चर्चा हो रही है।
हादसे के बाद परिवहन निगम की बसों की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि संबंधित बस काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी। उनका कहना है कि बस की समय पर तकनीकी जांच और रखरखाव में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
क्षेत्रवासियों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और दिवंगत चालक के परिवार को सम्मानजनक मुआवजा देने की मांग की है।
मौत सामने थी, फिर भी उसने स्टीयरिंग नहीं छोड़ा… 34 यात्रियों को नया जीवन देकर बेनीराम हमेशा के लिए अमर हो गए।
फोटो_ हादसे का काल बनी रोडवेज बस एवं दुर्घटना में चालक की गई जान।
चंपावत: हृदयविदारक हादसा! 34 यात्रियों की जान बचाकर खुद मौत से हार गया जांबाज चालक,खटारा बसों पर उठे सवाल।

