चंपावत में बन रहा भव्य ‘शिव धाम सर्किट’, 16 किमी सप्तकोशी परिक्रमा से मिलेगा मानसरोवर जैसा दिव्य अनुभव।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल को रफ्तार; मानेश्वर धाम बनेगा मानसरोवर यात्रियों का पहला पड़ाव, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया आयाम।

चंपावत। धार्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी पहल आकार ले रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परिकल्पना के अनुरूप जिले में ‘शिव धाम सर्किट’ विकसित किया जा रहा है, जिसके तहत 16 किलोमीटर लंबी सप्तकोशी परिक्रमा को पुनर्जीवित कर भव्य स्वरूप दिया जाएगा। इस परिक्रमा मार्ग में हरेश्वर, ऋषेश्वर, डिप्टेश्वर, कांतेश्वर, महामंडलेश्वर, ताड़केश्वर और मानेश्वर जैसे प्रमुख शिव धामों को जोड़ा जाएगा। श्रद्धालु बिना किसी विशेष अनुमति के इस सम्पूर्ण यात्रा को सहज रूप से पूरा कर सकेंगे और उन्हें मानसरोवर तीर्थ जैसा अलौकिक अनुभव प्राप्त होगा। योजना के तहत मानेश्वर धाम को विशेष रूप से विकसित किया जा रहा है, जहां दिल्ली सहित देशभर से आने वाले मानसरोवर यात्रियों के लिए विश्राम स्थल बनाया जाएगा। यहां श्रद्धालु ध्यान, योग और प्राणायाम के माध्यम से आध्यात्मिक शांति का अनुभव करेंगे। साथ ही मान्यता के अनुसार अर्जुन द्वारा मानसरोवर के जल को आवाहित कर इस स्थान में निकली जलधारा में स्नान कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर अपनी यात्रा आगे बढ़ाएंगे।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए सप्तकोशी परिक्रमा मार्ग को व्यवस्थित रूप देने और तीर्थ यात्रियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जिला पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि तकनीकी स्तर पर प्रारूप तैयार किया जा रहा है और मानेश्वर क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मानेश्वर धाम के पास करीब ढाई एकड़ भूमि है इस भूमि के कुछ भाग में प्रस्तावित इस योजना के आकार होने से चंपावत न केवल शिव भक्तों के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। “महादेव की प्रेरणा से ही संभव है ऐसी परिकल्पना” मानेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धर्मराज पुरी महाराज का कहना है कि मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन जिस समर्पण के साथ देवालयों के विकास में जुटे हैं, वह देवाधिदेव महादेव की कृपा का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस योजना के पूर्ण होने पर चंपावत का कण-कण शिवमय हो जाएगा और श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा के नए द्वार खुलेंगे।


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