देवभूमि की मर्यादा पर सुनियोजित हमला, पुलिस जांच में साजिश की खुलती परतों से मचा हड़कंप।
चंपावत। शांत पहाड़, सरल लोग और संस्कारों की पहचान बने चंपावत को बदनाम करने की कथित साजिश ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। एक नाबालिग को मोहरा बनाकर जिस तरह पूरे मामले को सनसनीखेज रूप देने की कोशिश की गई, उसने देवभूमि की गरिमा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
शुरुआत में जिस घटना को लेकर जिले का माहौल गर्माया गया, अब उसी मामले की जांच में ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जो पूरे घटनाक्रम को साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ लोगों ने निजी स्वार्थ, दबाव और रंजिश के चलते मामले को ऐसा मोड़ देने की कोशिश की, जिससे पूरे चंपावत की छवि धूमिल हो।
सूत्र बताते हैं कि सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों की पुष्टि किए अफवाहों और भ्रामक पोस्टों की बाढ़ ला दी गई। देखते ही देखते मामला इतना उछाला गया कि देवभूमि की शांत फिजाओं को भी शक और सनसनी के धुएं में ढकेलने का प्रयास होने लगा।
जनपद के लोगों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गहरा आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चंपावत हमेशा से संस्कृति, सम्मान और भाईचारे की भूमि रहा है, लेकिन कुछ लोग अपने निजी एजेंडे के लिए यहां की सादगी और प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने में जुटे हैं।
इधर पुलिस प्रशासन ने साफ कहा है कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। यदि किसी ने झूठी कहानी गढ़कर माहौल बिगाड़ने, निर्दोषों को फंसाने या जनपद को बदनाम करने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक मासूमों और संवेदनशील घटनाओं को साजिश, राजनीति और निजी स्वार्थ का हथियार बनाकर देवभूमि की अस्मिता को चोट पहुंचाई जाती रहेगी।
चंपावत: नाबालिग को ढाल बनाकर चंपावत को बदनाम करने का खेल!

