चंपावत बना पर्यटकों की पहली पसंद, 5 साल में 15 हजार से बढ़कर पहुंचे 2.79 लाख सैलानी।

Share This Post

धार्मिक, प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन ने बदली तस्वीर, सीमित प्रचार के बावजूद लगातार बढ़ रहा देसी-विदेशी पर्यटकों का रुझान।

चंपावत। उत्तराखंड का सीमांत जनपद चंपावत अब तेजी से पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। कोरोना काल के बाद जिले के धार्मिक, आध्यात्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की ओर देशी-विदेशी पर्यटकों का रुझान लगातार बढ़ा है। सीमित प्रचार-प्रसार के बावजूद बीते पांच वर्षों में पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में जिले में मात्र 15,711 पर्यटक पहुंचे थे। यह संख्या 2022 में बढ़कर 36,539 हुई। वर्ष 2023 में रिकॉर्ड उछाल के साथ 2,27,552 पर्यटक चंपावत आए, जबकि 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 2,75,198 पहुंच गया। वर्ष 2025 में भी 2,79,860 पर्यटक जिले पहुंचे, जिनमें 2,79,462 देशी और 398 विदेशी पर्यटक शामिल रहे।
हालांकि वर्ष 2025 में विदेशी पर्यटकों की संख्या में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन देशी पर्यटकों की लगातार बढ़ती आमद ने जिले की पर्यटन क्षमता को नई पहचान दी है। वर्ष 2026 के आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं हुए हैं, लेकिन होटल और होमस्टे पूरे सीजन भर लगभग फुल रहने से इस बार पर्यटकों का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है।
उड़ीसा से आए पर्यटक विजय का कहना है कि चंपावत का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। यदि यहां मनोरंजन और पर्यटन सुविधाओं का और विस्तार किया जाए तो बड़ी संख्या में पर्यटक नैनीताल और मसूरी के बजाय चंपावत का रुख करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर आधारभूत सुविधाएं, पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार और नई गतिविधियों का विकास होने पर चंपावत उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।


फोटो-चंपावत जिले में ऐसे रमणीक पर्यटक स्थल उनके आने का इंतजार कर रहे हैं।


Share This Post