चंपावत: शारदा कॉरिडोर पर उठे सवाल, नदी के सीने पर खनन के आरोप; प्रशासन से जांच की मांग।

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खेतखेड़ा में बरसात के बीच खनन और नदी के बहाव से छेड़छाड़ का आरोप, हाईकोर्ट अधिवक्ता ने डीएम से मांगी निष्पक्ष जांच।

टनकपुर/चंपावत। शारदा कॉरिडोर परियोजना के बीच खेतखेड़ा क्षेत्र में शारदा नदी को लेकर उठे सवालों ने अब प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नदी तल में खनन, प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़ और बरसात के दौरान कटाव व बाढ़ के खतरे को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. मदन सिंह मेहर ने जिलाधिकारी को ई-मेल भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बरसात के दौरान नदी क्षेत्र में खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि इससे शारदा नदी के प्राकृतिक स्वरूप और बहाव पर असर पड़ सकता है तथा भविष्य में नदी कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शारदा नदी सीमांत क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है। नदी से जुड़े किसी भी निर्माण या विकास कार्य में पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है। ऐसे में शिकायत सामने आने के बाद अब प्रशासन की जांच पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

सवाल आरोपों का नहीं, जांच का है_

शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन गंभीर आरोप सामने आने के बाद प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल निष्पक्ष जांच का है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप निराधार हैं तो जांच के जरिए स्थिति साफ होनी चाहिए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
बताया गया है कि मामले में खनन, राजस्व, वन और सिंचाई विभाग से जुड़े पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। वैज्ञानिक तरीके से नदी के बहाव, खनन की स्थिति और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन कर रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग भी उठ रही है।
शारदा कॉरिडोर विकास की बड़ी परियोजना है, लेकिन विकास के साथ शारदा नदी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या तस्वीर सामने आती है। फिलहाल निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर हैं।


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