स्थानीय उत्पादों से लेकर दीदी की रसोई और हिलांस कैफे तक, चंपावत की महिलाएं लिख रही हैं आत्मनिर्भरता की नई कहानी।
चंपावत। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से चंपावत जिले में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को नई दिशा मिली है। इन प्रयासों के केंद्र में अपर परियोजना निदेशक (एपीडी) विम्मी जोशी की अहम भूमिका रही है। उनके प्रयासों से जिले की सैकड़ों महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की राह पर आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें अपने उत्पादों के लिए एक स्थायी मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विम्मी जोशी ने लगातार प्रयास किए।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण सरस प्लाजा है। बताया जाता है कि पहले इस भवन का उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए किया जाना था, लेकिन विम्मी जोशी ने महिलाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए इस भवन को महिला समूहों के लिए उपलब्ध कराने के लिए लगातार संघर्ष किया। उनके प्रयासों के बाद आज यह भवन महिला समूहों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
विम्मी जोशी की पहल पर शुरू किया गया ( एपण )अभियान भी जिले में काफी चर्चित रहा है। इस पहल के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भरता से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है।
एपीडी विम्मी जोशी के मार्गदर्शन में जिले के महिला समूह स्थानीय संसाधनों से कई उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इनमें मंडवे के बिस्किट, स्थानीय नमकीन, अचार, पापड़, हैंडवॉश, राखियां, बांस से बनी टोकरियां और डलिया, पिरुल से बनी टोकरियां, टी-कोस्टर, की-चेन, लोहे के बर्तन, मूंज घास से बने उत्पाद, गोबर से बने दीये, ऊनी उत्पाद और खिलौने, जूट के उत्पाद तथा ऐपण कला से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।
महिला समूहों की गतिविधियां केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं हैं। जनपद और विकासखंड स्तर पर दीदी की रसोई का संचालन किया जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित हिलांस कैफे एवं आउटलेट स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने का काम कर रहा है। इसके अलावा महिलाएं ब्यूटी पार्लर, टेलर शॉप, किराना दुकान और डेयरी जैसे व्यवसायों के माध्यम से भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं।
महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। बेहतर गुणवत्ता और स्थानीय पहचान के कारण लोग जिले के बाहर से भी इन उत्पादों का ऑर्डर देकर उन्हें मंगवा रहे हैं।
इसी प्रकार केलपाल बाबा स्वयं सहायता समूह की सदस्य
रीतू कुलेठा ने ‘पार्वती टिफिन सर्विस’ की शुरुआत की। समूह को रिवॉल्विंग फंड से 25 हजार रुपये और सीआईएफ फंड से 75 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके बाद समूह ने टिफिन सेवा, कैटरिंग और पार्टी ऑर्डर का काम शुरू किया, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
विम्मी जोशी का मानना है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए उचित मंच, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। यही वजह है कि आज चंपावत की महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के दम पर सफलता की नई कहानी लिख रही हैं।
फोटो_अपर परियोजना निदेशक (एपीडी) विम्मी जोशी।
चंपावत: महिलाओं के सपनों को मिला नया आसमान, विम्मी जोशी के संघर्ष से सरस प्लाजा बना आत्मनिर्भरता का केंद्र।
