चंपावत: सोबन सिंह जीना की 127वीं जयंती पर परिसर में गूंजे राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के स्वर।

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महान स्वतंत्रता सेनानी के आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प, विचार गोष्ठी में छात्र-छात्राओं ने रखे अपने विचार।

चंपावत। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय परिसर, चंपावत में मंगलवार को महान स्वतंत्रता सेनानी और उत्तराखंड की राजनीति के प्रखर हस्ताक्षर स्वर्गीय सोबन सिंह जीना की 127वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन, राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के कार्यों को याद करते हुए उन्हें उत्तराखंड की प्रेरणास्रोत विभूति बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सोबन सिंह जीना के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। प्रभारी निदेशक एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) डॉ. भवान सिंह सहित परिसर के सभी प्राध्यापक कार्यक्रम में मौजूद रहे। कुलानुशासक डॉ. रवि जोशी और डॉ. रमेश राम ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, सामाजिक न्याय और जनहित के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था।
वक्ताओं ने कहा कि सोबन सिंह जीना केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक, शिक्षाविद और दूरदर्शी चिंतक भी थे। उनके विचार और सिद्धांत आज भी युवाओं को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपने विचार व्यक्त करते हुए उनके बताए आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प दोहराया।

फोटो_ सोबन सिंह जीना की 127वीं जयंती पर चंपावत परिसर में आयोजित विचार गोष्ठी में मौजूद प्राध्यापक और छात्र-छात्राएं।


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