चंपावत: लोहाघाट डिपो की बस पांच किलोमीटर में हुई खराब, 26 यात्री सड़क किनारे इंतजार करने को मजबूर!

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चंपावत/लोहाघाट। पहाड़ में रोडवेज बसों की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। बरेली के लिए रवाना हुई लोहाघाट डिपो की रोडवेज बस मानेश्वर के पास पहुंचते ही खराब हो गई। रेडिएटर लीक होने के कारण बस सड़क किनारे खड़ी करनी पड़ी और उसमें सवार 26 यात्रियों को दूसरी बस के इंतजार में परेशान होना पड़ा।
मामला केवल एक बस की तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि यदि कोई बस महज पांच किलोमीटर का सफर भी बिना खराब हुए तय नहीं कर सकती तो उसे यात्रियों को लेकर सड़क पर चलने की अनुमति आखिर किस आधार पर दी गई?

पिछले कुछ समय से लोहाघाट और आसपास के मार्गों पर रोडवेज बसों के बीच रास्ते में खराब होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इससे बसों की फिटनेस, नियमित सर्विसिंग और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों का कहना है कि किराया पूरा देने के बावजूद उन्हें भरोसेमंद और सुरक्षित यात्रा की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

पहाड़ में रोडवेज बसें केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि आम लोगों की जीवनरेखा हैं। मरीजों को अस्पताल, छात्रों को परीक्षा केंद्र और नौकरीपेशा लोगों को अपने कार्यस्थल तक पहुंचाने में इन बसों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में बीच रास्ते में बसों के जवाब दे देने से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

अब जरूरत केवल बयानबाजी की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने की है। लोहाघाट डिपो की बसों की तकनीकी स्थिति की जांच कर खराब और अनुपयुक्त वाहनों को सड़क से हटाने की मांग उठ रही है। साथ ही नियमित फिटनेस जांच और पर्याप्त नई बसों की व्यवस्था भी जरूरी है।

बड़ा सवाल यही है कि क्या परिवहन निगम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? पहाड़ के यात्रियों को खटारा बसों की मजबूरी नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन चाहिए। अब सरकार और परिवहन निगम को तय करना होगा कि रोडवेज यात्रियों की परेशानी का कारण बना रहेगा या उनकी सुरक्षित यात्रा का भरोसा।

फोटो_मानेश्वर के पास खराब खड़ी रोडवेज बस।


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