

भोटेकोशी के सैलाब में उजड़ीं बस्तियां, बहे पुल-सड़कें; 384 लोग लापता, 105 भारतीय भी शामिल।
चंपावत/काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र को हिला दिया। भोटेकोशी नदी में अचानक आए सैलाब ने रसुवा, नुवाकोट और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचा दी। कम से कम 95 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 384 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। सैलाब अपने साथ मकान, वाहन, पुल, सड़कें और बिजली से जुड़ी परियोजनाएं तक बहा ले गया।
रसुवा जिले का तिमुरे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। अचानक आई पानी की तेज धार और मलबे ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। कई जगह पूरी बस्तियां तबाह हो गईं। सड़क और पुल टूटने से प्रभावित इलाकों का संपर्क भी बाधित हो गया है। राहत दलों के सामने मलबे के बीच फंसे लोगों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
तिब्बत से आया सैलाब, चीन में भी तबाही_
नेपाल के साथ तिब्बत के जिरोंग क्षेत्र में भी आपदा का व्यापक असर पड़ा है। जिरोंग सीमा बंदरगाह पर मलबे और बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। चीन ने सैकड़ों बचावकर्मियों को प्रभावित क्षेत्र में उतारा है। दोनों देशों की एजेंसियां युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।
105 भारतीयों के लापता होने से बढ़ी चिंता_
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक करीब 384 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनमें 291 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें 105 भारतीय नागरिक भी बताए गए हैं। बड़ी संख्या में लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े थे। भारत सरकार ने भी प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी और सहायता के लिए कदम तेज कर दिए हैं।
पहाड़ से आया मलबा बना मौत का सैलाब_
प्रारंभिक आकलनों के मुताबिक तिब्बत की ओर भूस्खलन या हिम-पत्थर के भारी मलबे के कारण नदी का प्रवाह बाधित हुआ और अचानक पानी का दबाव बढ़ गया। कुछ रिपोर्टों में भूकंप के बाद हुए हिम-पत्थर के मलबे को संभावित कारण बताया गया है। हालांकि आपदा की अंतिम वजह की जांच अभी जारी है।
दूसरी बाढ़ का भी मंडरा रहा खतरा_
तबाही के बाद भी खतरा टला नहीं है। नदी के ऊपरी हिस्से में मलबे से अवरोध बनने की आशंका है। यदि यह अवरोध अचानक टूटता है तो निचले इलाकों में फिर तेज बाढ़ आ सकती है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और किसी भी हालत में नदी के करीब नहीं जाने की चेतावनी दी है। भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
नेपाल सेना ने राहत-बचाव अभियान में 14 हेलीकॉप्टर लगाए हैं। खराब मौसम, बढ़ता जलस्तर और टूटे सड़क मार्ग अभियान में बड़ी बाधा बने हुए हैं। प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने और लापता लोगों की तलाश का काम लगातार जारी है।
हिमालय में आई इस त्रासदी ने एक बार फिर पहाड़ों की बढ़ती प्राकृतिक संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। एक तरफ 95 मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ने की आशंका है, तो दूसरी तरफ सैकड़ों परिवार अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। नेपाल में इस वक्त हर गुजरता घंटा जिंदगी और मौत के बीच की जंग बन गया है।
फोटो_नेपाल में भीषण सैलाब के बाद तबाही का मंजर।




