

मायावती में इंग्लैंड के विशेषज्ञों ने किए जटिल ऑपरेशन, पहाड़ों में बढ़ती बीमारी ने बढ़ाई चिंता।
लोहाघाट। गॉल ब्लैडर की पथरी अब केवल बड़ों की बीमारी नहीं रह गई है। मायावती में चिकित्सा शिविर के दौरान आठ वर्ष तक के बच्चों में भी पित्ताशय की पथरी के मामले सामने आए। इंग्लैंड से पहुंचे विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने दरबार चिकित्सालय में करीब एक दर्जन गंभीर मरीजों के दूरबीन विधि से जटिल ऑपरेशन किए। विशेषज्ञों ने महिलाओं में इस बीमारी के अधिक मामले सामने आने को लेकर भी चिंता जताई।
टीम के लीडर डॉ. कृष्णा सिंह ने कहा कि पहाड़ों में महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त रहती हैं कि अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं। पेट में लगातार दर्द होने पर कई लोग चिकित्सक से सलाह लेने के बजाय पेनकिलर लेकर काम चलाते हैं। उन्होंने चेताया कि दर्द को दबाना बीमारी का इलाज नहीं है, समय पर जांच और उचित उपचार जरूरी है।
डॉ. सिंह ने बताया कि शुरुआती अवस्था में बीमारी का पता चलने पर उपचार आसान रहता है। कई मामलों में गॉल ब्लैडर की पथरी का स्थायी उपचार ऑपरेशन से ही संभव होता है और दूरबीन विधि से इसका उपचार किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों में समस्या सिर्फ बीमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ उपचार सुविधाओं की कमी भी बड़ी चुनौती है। देहरादून और हल्द्वानी में सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
चिकित्सकों ने खानपान में सावधानी बरतने की सलाह देते हुए दोबारा गर्म किए गए तेल के इस्तेमाल से बचने और पैकेज्ड व अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करने को कहा।
प्राकृतिक जलस्रोतों के पानी की गुणवत्ता की जांच और सुरक्षित पेयजल के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। साथ ही स्थानीय पारंपरिक पर्वतीय खाद्य पदार्थों को संतुलित आहार में शामिल करने की सलाह दी।
डॉ. कृष्णा सिंह ने बताया कि इंग्लैंड से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के सदस्य आने वाले समय में फिर मायावती पहुंचेंगे और गॉल ब्लैडर से जुड़े मामलों पर आगे शोध और अध्ययन करेंगे।
फोटो_मायावती में गॉल ब्लैडर के जटिल ऑपरेशन करने वाली विशेषज्ञ टीम के लीडर डॉ. कृष्णा सिंह।




