

हर जिले में बनेगा सांस्कृतिक ग्राम, 1,500 पांडुलिपियां संग्रहित।
चंपावत। देववाणी संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उत्तराखंड संस्कृत अकादमी ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अकादमी के सचिव डॉ. विनय विद्यालंकार ने बताया कि अगले दो माह में प्रदेश में चार वेद अध्ययन केंद्र खोले जाएंगे। इनमें दो केंद्र कुमाऊं और दो गढ़वाल मंडल में स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशन में प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक सांस्कृतिक ग्राम विकसित करने की योजना भी है। इन ग्रामों में लोक कलाकारों के माध्यम से संस्कृत को बोलचाल और व्यवहार का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जाएगा। संस्कृत विद्वानों के साथ भाषा के प्रचार-प्रसार में जुटी महिलाओं को भी सम्मानित किया जाएगा। अल्पसंख्यक विद्यालयों में संस्कृत के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है।
डॉ. विद्यालंकार ने बताया कि उत्तराखंड के ऋषि-मुनियों की ज्ञान परंपरा से जुड़ी करीब 1,500 पांडुलिपियां अब तक संग्रहित की जा चुकी हैं। परीक्षण के बाद इनका प्रकाशन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति, ज्ञान और संस्कारों की महत्वपूर्ण धरोहर है।
उन्होंने बताया कि संस्कृत को जनजीवन से जोड़ने के प्रयासों के तहत खटीमा के नगला तराई में थारू जनजाति की महिलाओं द्वारा संस्कृत में संवाद किया जा रहा है। अकादमी का प्रयास संस्कृत को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक और पारिवारिक जीवन से जोड़ना है।
23 सितंबर से शुरू होंगी प्रतियोगिताएं_
संस्कृत अकादमी की ओर से प्रदेशभर में संस्कृत प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। करीब 60 हजार छात्र-छात्राओं के इनमें शामिल होने की संभावना है। 23-24 सितंबर को ब्लॉक स्तर, 7-8 अक्टूबर को जिला स्तर और 23-24 नवंबर को राज्य स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इस बार निजी विद्यालयों के शिक्षकों को भी संयोजक बनाकर वहां के विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं से जोड़ा जा रहा है।
फोटो_ उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. विनय विद्यालंकार।




