

गाय का दूध 61 और भैंस का 71 रुपये लीटर करने की मांग, चारे का अनुदान व सचिव प्रोत्साहन बढ़ाने की भी मांग।
चंपावत। पहाड़ में पशुपालन को रोजगार का मजबूत जरिया बनाने के दावों के बीच दुग्ध उत्पादकों का सब्र अब जवाब देने लगा है। दूध की खरीद दर बढ़ाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर पशुपालकों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि अब आश्वासन नहीं, मांगों पर फैसला और उसका धरातल पर असर चाहिए।
चंपावत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने 23 सितंबर को यूसीडीएफ के प्रबंध निदेशक को भेजे पत्र में पशुपालकों और दुग्ध समितियों के सचिवों की मांगों को रखा है। पशुपालक 3.50 प्रतिशत वसा और 7.50 प्रतिशत एसएनएफ वाले गाय के दूध की खरीद दर 61 रुपये और भैंस के दूध की 71 रुपये प्रति लीटर करने की मांग कर रहे हैं।
दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन की राशि भी चार से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करने की मांग उठाई गई है। संघ के अनुसार खरीद दर में वृद्धि का प्रस्ताव आगामी प्रबंध कमेटी की बैठक में रखा जाएगा। पशु आहार, भूसा और साइलेज महंगा होने से पशुपालकों की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने पशु आहार और भूसे पर अनुदान 50 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तथा साइलेज पर 60 से बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने की मांग की है।
संघ ने समितियों को दूध की मात्रा के आधार पर समय पर पशु चारा उपलब्ध कराने और बड़े पशुपालकों व मिनी डेयरी इकाइयों के पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए रोस्टर तैयार करने की बात कही है। मगर पशुपालकों के सामने सवाल है कि कागज पर बने निर्देश आखिर गांव तक कब पहुंचेंगे?
पर्वतीय दुग्ध समितियों के सचिवों को फिलहाल सिर्फ 50 पैसे प्रति लीटर प्रोत्साहन मिलता है। सचिव संगठन इसे बढ़ाकर दो रुपये प्रति लीटर करने की मांग पर अड़ा है। संघ ने माना है कि पहाड़ में दूध उत्पादन कम होने से सचिवों की आय भी प्रभावित होती है।
पाटी के बिसारी क्षेत्र में करीब 900 लीटर दूध प्रतिदिन एकत्र हो रहा है। बावजूद इसके दूध को सुरक्षित रखने के लिए दुग्ध अवशीतन केंद्र अब तक स्थापित नहीं हुआ है। केंद्र की स्थापना के लिए जिलाधिकारी ने निरीक्षण टीम गठित की है। टीम की रिपोर्ट और अनुशंसा के बाद केंद्र स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
पशुपालकों का कहना है कि दूध उत्पादन बढ़ाने की बात तभी सार्थक होगी, जब दूध की सही कीमत, चारे की राहत और सुरक्षित संग्रहण की व्यवस्था भी साथ बढ़े। उनका स्पष्ट ऐलान है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब आगामी प्रबंध कमेटी की बैठक में होने वाले फैसले पर पशुपालकों की नजर है। इस बार देखना यह है कि आंदोलन की आवाज बैठक की कार्यवाही तक सीमित रहती है या फैसले की शक्ल लेकर गांव तक पहुंचती है।
फोटो_ राजेश बिष्ट।




