

सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सुरक्षा और कर्मचारी का दर्जा देने की मांग, सरकार को आंदोलन की चेतावनी
चंपावत। मानदेय में बढ़ोतरी, न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पेंशन और सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता की मांग को लेकर उत्तराखंड की आशा कार्यकर्ताओं ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशभर की आशा कार्यकर्ता 22 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगी।
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय, कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है।
संगठन ने मानदेय में वृद्धि, न्यूनतम वेतन निर्धारित करने, कर्मचारी का दर्जा देने, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और रिटायरमेंट पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता देने की मांग उठाई है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) का बजट बढ़ाने, एनजीओ की भूमिका समाप्त करने, आशा कार्यकर्ताओं की छंटनी रोकने और अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पद भरने की मांग भी की गई है।
आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। संगठन ने सरकार से मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी होने पर 22 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच कर आंदोलन किया जाएगा।
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा, पदमा प्रथोली, चंपा राय, ब्लॉक अध्यक्ष रीता सिंह, रुक्मणि जोशी, हेमा जोशी, विनीता पांडेय, ज्योति उपाध्याय, धनी मेहता, ममता बिष्ट, पुष्पा बोहरा, तनुजा पांडेय और कमला जोशी सहित अन्य आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
फोटो_मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान करतीं आशा कार्यकर्ता।




