टनकपुर/चंपावत। अपनों से बिछड़ने का दर्द क्या होता है, यह उस नेपाली महिला की आंखों में साफ दिखाई दे रहा था। मानसिक रूप से अस्वस्थ हालत में टनकपुर क्षेत्र में मिली महिला के लिए चंपावत पुलिस सहारा बनी और आखिरकार उसे उसके परिवार तक पहुंचाने में कामयाब रही। पुलिस की इस मानवीय पहल से एक बिछड़े परिवार को फिर से उसकी अपनी सदस्य मिल गई।
पुलिस अधीक्षक रेखा यादव के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी टनकपुर निहारिका सेमवाल के पर्यवेक्षण में एएचटीयू चंपावत की टीम को 23 जुलाई को टनकपुर क्षेत्र में एक नेपाली मूल की महिला मिली। पूछताछ में महिला ने खुद को नेपाल के जिला छाया, ओडो नंबर-04 का निवासी बताया। उसने बताया कि वह मथुरा-वृंदावन में अपने परिजनों से बिछड़ गई थी।
महिला की स्थिति को देखते हुए पुलिस टीम ने तत्काल उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की और उसे अकेला नहीं छोड़ा। एएचटीयू ने नेपाल की एनजीओ से संपर्क कर महिला के सुरक्षित पुनर्वास और परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद महिला को एनजीओ प्रतिनिधियों के सुपुर्द किया गया, जिसके बाद उसे सुरक्षित रूप से उसके परिवार से मिला दिया गया।
चंपावत पुलिस की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ अपराध रोकना नहीं, बल्कि मुसीबत में फंसे हर इंसान का हाथ थामना भी है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी असहाय, मानसिक रूप से अस्वस्थ अथवा बिछड़े व्यक्ति के दिखाई देने पर तत्काल 112 या नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें। आपकी एक छोटी-सी सूचना किसी परिवार को उसका अपना वापस लौटा सकती है।
फोटो_बिछड़ी नेपाली महिला को सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी करती एएचटीयू चंपावत की टीम।
चंपावत: अपनों से बिछड़ी नेपाली महिला के लिए देवदूत बनी चंपावत पुलिस, सीमा पार परिवार से कराया मिलन।
