

चंपावत/देवीधुरा। मां बाराही के जयकारे, मंदिर से गूंजता शंखनाद और फिर खोलीखांड दुबाचौड़ का ऐतिहासिक मैदान आस्था, साहस और परंपरा के अद्भुत संगम का साक्षी बन गया। चार खाम-सात थोक के रणबांकुरे आमने-सामने डटे और करीब आठ मिनट तक चली विश्व प्रसिद्ध मां बाराही बग्वाल में 180 से अधिक बग्वाली वीर घायल हो गए।
रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित बग्वाल को देखने के लिए सुबह से ही देवीधुरा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालु इस सदियों पुरानी परंपरा के साक्षी बने।
प्रधान पुजारी द्वारा पूजा-अर्चना के बाद चारों खामों के बग्वाली वीर मैदान में पहुंचे। वालिक खाम के वीर सफेद, चम्याल के गुलाबी, गहड़वाल के भगवा और लमगड़िया खाम के वीर पीले रंग की पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। बांस और रिंगाल से निर्मित ढालों के साथ रणबांकुरे अपनी-अपनी जगहों पर डट गए।
दोपहर 1:48 बजे शंखनाद के साथ बग्वाल शुरू हुई और करीब आठ मिनट बाद 1:55 बजे समाप्त हुई। इस दौरान फलों और फूलों की बरसात के बीच मां बाराही के जयकारों से पूरा मैदान गूंज उठा। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को शुभ एवं फलदायी माना जाता है।
बग्वाल समाप्त होने तक 180 से अधिक रणबांकुरे चोटिल हो चुके थे। घायलों के उपचार के लिए पहले से चिकित्सा शिविर लगाए गए थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान की निगरानी में स्वास्थ्य टीमें मुस्तैद रहीं और घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया।
विश्व प्रसिद्ध बग्वाल मेले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा पहुंचे। उन्होंने शक्तिपीठ मां बाराही के दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने देवीधुरा की बग्वाल को उत्तराखंड की आस्था, लोक संस्कृति और भाईचारे की जीवंत विरासत बताया। उन्होंने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही और 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण शीघ्र कराने की घोषणा की।
इस वर्ष चारों खामों के करीब 550 से अधिक बग्वाली वीरों ने निर्धारित ड्रेस कोड में हिस्सा लिया। परंपरा के अनुसार बग्वाल समाप्त होते ही कुछ देर पहले तक आमने-सामने डटे रणबांकुरे एक-दूसरे के गले मिले और भाईचारे का संदेश दिया।
देवीधुरा की बग्वाल ने एक बार फिर साबित किया कि यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, साहस, संस्कृति और भाईचारे की सदियों पुरानी जीवंत विरासत है।
फोटो_ खोलीखांड दुबाचौड़ मैदान में मां बाराही के जयकारों के बीच ऐतिहासिक बग्वाल में शामिल चारों खामों के रणबांकुरे।







