चंपावत: जब डीएम बने जनता के अपने अधिकारी- चंपावत में मनीष कुमार की कार्यशैली बनी मिसाल।

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न सुरक्षा का दिखावा, न पद का अहंकार; जनसेवा को मिशन बनाकर रोज 15 घंटे जनता के बीच काम कर रहे हैं जिलाधिकारी।


चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मॉडल जिले चंपावत में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से बदलाव दिखाई दे रहा है, लेकिन इन उपलब्धियों के पीछे एक ऐसा प्रशासनिक चेहरा भी है जिसने आम जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। यह चेहरा है जिलाधिकारी मनीष कुमार का, जिनकी कार्यशैली, सादगी और जनसेवा के प्रति समर्पण आज जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में उनसे मुलाकात के दौरान जो दृश्य सामने आया, उसने प्रशासनिक अधिकारियों की पारंपरिक छवि को बदलकर रख दिया। न किसी प्रकार का प्रशासनिक आडंबर, न सुरक्षा का अनावश्यक घेरा और न ही पद का कोई दिखावा। एक सहज, सरल और मुस्कुराते हुए अधिकारी आम लोगों के बीच उनकी समस्याएं सुनते और समाधान के लिए तत्पर दिखाई दिए। जिलाधिकारी मनीष कुमार से हुई बातचीत ने यह एहसास कराया कि किसी प्रशासनिक पद की वास्तविक गरिमा उसके अधिकारों में नहीं, बल्कि जनता के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भावना में निहित होती है। प्रतिदिन लगभग 15 घंटे जनहित के कार्यों में सक्रिय रहने वाले डीएम न केवल लोगों की समस्याएं सुनते हैं, बल्कि उनके समाधान के लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी गंभीर प्रयास करते हैं।
जब उनसे पूछा गया कि इतनी ऊर्जा और समर्पण का स्रोत क्या है, तो उनका जवाब बेहद प्रेरणादायक था। उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में संघर्ष, अभाव और लोगों की परेशानियों को बेहद करीब से देखा है। अधिकारी बनने के बाद उनका एक ही सपना था कि वे जरूरतमंद लोगों के दुख कम करने का माध्यम बनें।
उनके शब्द थे, “जब किसी पीड़ित व्यक्ति की समस्या का समाधान होता है और उसके चेहरे पर संतोष दिखाई देता है, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। ईश्वर ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है, उसका सही उपयोग तभी है जब मैं लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकूं।” मनीष कुमार का मानना है कि जनता ही वह शक्ति है, जिसके कारण अधिकारियों को सम्मान और पहचान मिलती है। ऐसे में यदि अधिकारी जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करें, तो शासन और प्रशासन दोनों अधिक प्रभावी बन सकते हैं।
चंपावत के गांवों से लेकर नगर क्षेत्रों तक आज उनकी कार्यशैली की चर्चा सुनाई देती है। आम लोगों का कहना है कि जिलाधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं को समझने और उनका समाधान कराने में विश्वास रखते हैं। यदि उत्तराखंड के सभी जिलों में इसी सोच, अनुशासन, संवेदनशीलता और जनकेंद्रित कार्य संस्कृति वाले अधिकारी कार्य करें, तो राज्य का समग्र विकास और अधिक गति पकड़ सकता है। चंपावत के लिए यह सौभाग्य की बात है कि उसे ऐसा जिलाधिकारी मिला है, जिसकी पहचान केवल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि जनसेवक के रूप में स्थापित हो रही है। जनसेवा को अपना मिशन मानकर कार्य कर रहे मनीष कुमार आज प्रशासनिक व्यवस्था में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभरे हैं और यह संदेश दे रहे हैं कि जनता के दिलों में जगह बनाने के लिए पद नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और समर्पण की आवश्यकता होती है।

फोटो_ आपदा ग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण के लिए जाते जिलाधिकारी मनीष कुमार।


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