उद्यान विभाग और राजस्व टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण, किसानों ने जताई मुआवजे की उम्मीद।
लोहाघाट। पंचेश्वर घाटी में मंगलवार शाम आए तेज तूफान ने क्षेत्र के आम और लीची उत्पादकों की मेहनत पर बड़ा असर डाला है। तूफान से फलों से लदे पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि कई स्थानों पर कच्चे आम और लीची जमीन पर गिर गए। बुधवार प्रातः उद्यान विभाग एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया। उद्यान विभाग के एडीओ आशीष रंजन खर्कवाल तथा राजस्व उप निरीक्षक ने ग्रामीणों के साथ ग्राम निडिल, मल्ला खाइकोट और ग्राम विविल पहुंचकर आम के व्यवसाय एवं बागवानी से जुड़े काश्तकारों के बगीचों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में सबसे अधिक क्षति आम के पेड़ों और फलों को पाई गई। ग्रामीणों ने बताया कि तेज आंधी और तूफान के चलते कई पेड़ों की शाखाएं टूट गईं और बड़ी मात्रा में फल झड़ गए। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि तूफान से शिमला मिर्च एवं मक्का की फसल को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि इस समय आम की फसल तैयार होने के अंतिम चरण में थी, ऐसे में अचानक आए तूफान ने आर्थिक नुकसान बढ़ा दिया है।
पंचेश्वर क्षेत्र को गर्म घाटी क्षेत्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में किसानों ने आम के हजारों पेड़ लगाए हुए हैं। कोरोना काल के दौरान यहां के जैविक स्वाद वाले आमों की मांग तेजी से बढ़ी थी, जिसके बाद क्षेत्र के कई किसानों ने बागवानी को आय का प्रमुख साधन बनाया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय किसान तेज सिंह, वीर सिंह, ओंकार धौनी, होशियार सिंह, माधवानंद पंत, आन देव पंत, शंकर सिंह, ललित सिंह सामंत, खिमानंद सुतेड़ी, गोविंद राम, नारायण राम, जयदत्त पंत, महेश भट्ट एवं नारायण दत्त भट्ट सहित कई प्रभावित किसानों ने अपने बगीचों का निरीक्षण करवाया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं मीडिया का आभार जताते हुए कहा कि उनकी पहल पर विभागीय टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन किया, जिससे प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
फोटो – पंचेश्वर घाटी के प्रभावित बागानों का निरीक्षण करते उद्यान विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारी।
चंपावत: पंचेश्वर घाटी में तूफान का कहर, आम और लीची बागानों में भारी तबाही।

