चंपावत हादसा- खेल अभ्यास बना काल, भाला लगने से छात्र की मौत से पसरा मातम।

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गौरलचौड़ मैदान में दर्दनाक हादसा, पॉलिटेक्निक छात्र की गई जान ने लील ली परिवार की खुशियां।

चंपावत। शनिवार को गौरलचौड़ मैदान में राजकीय पॉलिटेक्निक की वार्षिक खेल प्रतियोगिताओं से पहले चल रहे अभ्यास के दौरान हादसे को लोग नहीं भूल पा रहे है। गंभीर रूप से घायल छात्र को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया था।लेकिन संवेदनशील स्थान पर गहरी चोट लगने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ी हुई है। पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने खुद घटना स्थल का मौका मुआयना करने के बाद जांच एसएसआई लक्ष्मण सिंह को सौंपी गई है। हालांकि अभी तक मृतक के परिजनों की ओर से पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी गई है। अलबत्ता एसपी नहीं चाहती है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही से किसी का अनमोल जीवन समाप्त नहीं होना चाहिए जिसके लिए सावधानी बरती जानी चाहिए। सीएमओ डॉ देवेश चौहान के अनुसार छात्र के ऐसे नाजुक स्थान में भाले ने ऐसी चोट मारी थी जो बेहद संवेदनशील अंग था।
रविवार सुबह मृतक के पिता भूपाल सिंह बोहरा गुजरात से अपने गांव पहुंचे। दो सदस्यीय मेडिकल पैनल डॉ. शौर्य एवं डॉ. दीपेंद्र द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद शव को सीएमओ द्वारा उनके पैतृक गांव मछियाण पहुंचाया गया। गांव के श्मशान घाट में बेहद गमगीन माहौल में आज अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इकलौते बेटे को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। सीएमओ ने इस बात का भी खंडन किया कि उनके संज्ञान में यह आया था कि घटना के वक्त जिला अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे, बल्कि डॉक्टर पहले से मौजूद थे और घायल छात्र का तुरंत परीक्षण किया गया जो पहले से मृत था तथा उसे देखने के बाद सभी डॉक्टर अपने_अपने केबिन में चले गए थे, जहां रोगी उनका इंतजार कर रहे थे। सोमेन्द्र सिंह बोहरा अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। बेटे को खोने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।

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मानवता की मिसाल बने डीएम, पिता को समय पर पहुंचाया अंतिम संस्कार में।

लोहाघाट‌। नियति के इस क्रूर चक्र के सामने सभी प्रयास असफल रहे, लेकिन इकलौते बेटे के अंतिम दर्शन पिता कर सकें, इसके लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने संवेदनशील पहल की। गुजरात में मौजूद मृतक के पिता को दिल्ली तक एयरलिफ्ट कराने और वहां से गांव तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था प्रशासन ने की, जिससे वह समय पर अंतिम संस्कार में शामिल हो सके। पीड़ित परिवार और ग्रामीण उस समय भावुक हो उठे जब स्वयं जिलाधिकारी 85 किलोमीटर दूर मछियाण गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे। यहां लोगों को प्रशासन का मानवीय चेहरा देखने को मिला। जिलाधिकारी ने कहा कि दुख को कम करना संभव नहीं, लेकिन इस कठिन समय में मानवीय संवेदनाएं ही परिवार को संबल दे सकती हैं। उधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घटना पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की।
अंतिम संस्कार में जिपं. सदस्य सोनू बोहरा, पूर्व जिपं सदस्य भोला बोहरा, विनोद बड़ेला, लक्ष्मण सिंह बोहरा, कुन्दन बोहरा,जगदीश सिंह बोहरा, चंद्रशेखर गड़कोटी समेत कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य विनय शर्मा व शिक्षकों ने भी छात्र को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

फोटो – मृतक सोमेन्द्र सिंह बोहरा का फाइल फोटो व अंतिम संस्कार में परिजनों को सांत्वना देते जिलाधिकारी मनीष कुमार।


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