

नेपाल सीमा से लगे 11 गांवों में बढ़ेगी आजीविका गतिविधियां, स्थानीय उत्पादों को एसएसबी और पूर्णागिरि मेले की जरूरतों से जोड़ने की योजना।
चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परिकल्पना के अनुरूप मॉडल चंपावत को विकास और रोजगार से जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। ग्राम विकास, लघु एवं सूक्ष्म उद्यम तथा खादी ग्रामोद्योग मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री भरत चौधरी ने बताया कि जिले के लिए दीर्घकालिक और अल्पकालिक योजनाओं का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। उनका कहना है कि योजनाओं को धरातल पर उतारकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर रहेगा।
प्रभारी मंत्री के अनुसार नेपाल सीमा से लगे 11 वाइब्रेंट गांवों में सब्जी और फल उत्पादन के साथ बकरी पालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन समेत अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। यहां तैयार होने वाले उत्पादों को सीमा पर तैनात एसएसबी की जरूरतों से जोड़ने की योजना है। इसके अलावा भविष्य में वर्षभर चलने वाले मां पूर्णागिरि मेले की जरूरतों को भी स्थानीय उत्पादन से पूरा करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
उन्होंने बताया कि चंपावत की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में आलू, हल्दी और अदरक के बीज तथा फलदार पौधे जिले में ही तैयार कराने पर काम किया जाएगा। इन गतिविधियों को महिला समूहों से जोड़कर उत्पादन और विपणन को बढ़ावा दिया जाएगा।
मधुमक्खी पालन से बढ़ेगा फल-सब्जियों का उत्पादन
प्रभारी मंत्री ने मधुमक्खी पालन को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा मिलने से प्राकृतिक परागण के कारण फल, सब्जी और फूलों के उत्पादन में 30 से 35 प्रतिशत तक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं चंपावत के जैविक शहद को उसके स्वाद और औषधीय गुणों के कारण बेहतर बाजार और अधिक मूल्य मिलने की उम्मीद है।
भारत चौधरी ने कहा कि योजनाओं की सफलता के लिए जिला प्रशासन की क्विक एक्शन कार्यशैली और लगातार मॉनिटरिंग जरूरी है। योजनाओं की नियमित निगरानी के साथ विभागों के बीच समन्वय बनाया जाएगा, ताकि विकास और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सके।
फोटो_मंत्री भरत चौधरी।




