चंपावत: काम पुलिस जैसा, वेतन में इतना अंतर क्यों? हक के लिए लामबंद हुए पीआरडी जवान।

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समान वेतन, सालभर रोजगार और महंगाई भत्ते की मांग
तेज, देहरादून के आंदोलन को चंपावत का समर्थन

देहरादून/चंपावत। आपदा में राहत-बचाव से लेकर मेलों में सुरक्षा व्यवस्था और जंगलों की आग बुझाने तक जिम्मेदारियां निभाने वाले प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवान अब अपने हक के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। जिम्मेदारियां निभाने में पीछे नहीं रहने वाले जवान मानदेय और सुविधाओं के मामले में भी समानता की मांग कर रहे हैं। इसी को लेकर देहरादून में चल रहे आंदोलन को चंपावत के जवानों ने समर्थन दिया है।

पीआरडी संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष संजय पवार के नेतृत्व में देहरादून में धरना-प्रदर्शन जारी है। संगठन की प्रमुख मांगों में सालभर रोजगार, समान कार्य के लिए समान वेतन और होमगार्ड की तर्ज पर मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता देना शामिल है। जवानों का कहना है कि उनसे विभिन्न परिस्थितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई जाती हैं, ऐसे में उनकी सेवाओं के अनुरूप मानदेय और सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।

पीआरडी के चंपावत जिलाध्यक्ष भैरब जोशी ने कहा कि जिले में जवानों को पूरे वर्ष रोजगार मिल रहा है, लेकिन समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग अब भी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि देहरादून में आंदोलन कर रहे जवानों की मांगों के समर्थन में चंपावत के जवान भी उनके साथ खड़े हैं।

जोशी के अनुसार, पीआरडी जवान पुलिसकर्मियों के समान कई जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन भुगतान में बड़ा अंतर है। उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों को लगभग 45 से 50 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि पीआरडी जवानों का भुगतान दैनिक मानदेय और ड्यूटी मिलने पर निर्भर करता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए जवान समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग उठा रहे हैं।

फोटो_ समान वेतन और अन्य मांगों को लेकर देहरादून में धरना-प्रदर्शन करते पीआरडी जवान।


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