चंपावत: 1200 से अधिक लोगों को मौत के मुंह से निकाल चुके हैं जल पुलिस के ‘पहलवान’, मानवता की मिसाल बने रविंद्र कुमार।

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19 वर्षों से शारदा घाट पर निभा रहे जनसेवा का दायित्व, ईमानदारी और साहस से बने लोगों के लिए ‘जीवन रक्षक’; घायल पशुओं की सेवा और खोया सामान लौटाकर भी जीता लोगों का विश्वास।


चंपावत। पुलिस का मूल उद्देश्य जनसेवा और लोगों की सुरक्षा है। जब कोई व्यक्ति संकट में होता है तो उसे सबसे पहले भगवान और पुलिस की याद आती है। ऐसे में पुलिसकर्मियों का व्यवहार और सेवा भाव ही जनता का विश्वास मजबूत करता है। टनकपुर के दादूपुर स्थित शारदा घाट पर पिछले 19 वर्षों से जल पुलिस में तैनात तैराक रविंद्र कुमार उर्फ ‘पहलवान’ इसी विश्वास का जीवंत उदाहरण हैं। रविंद्र कुमार अब तक अपनी जान जोखिम में डालकर 1200 से अधिक लोगों को डूबने से बचा चुके हैं। उनकी इस अद्वितीय सेवा के लिए उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों और अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जा चुका है। रुड़की के मोहनपुर गांव के जाट परिवार में जन्मे रविंद्र कुमार में बचपन से ही सेवा और मानवता की भावना रही है। उन्होंने केवल पुलिस विभाग की गरिमा ही नहीं बढ़ाई, बल्कि इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी जितनी भी सराहना की जाए, कम है।
शारदा घाट पर ड्यूटी के दौरान वह केवल डूबते लोगों को बचाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि घाट के आसपास कई किलोमीटर तक निगरानी रखते हैं। वे लोगों को नदी में खतरनाक स्थानों पर जाने से रोकते हैं और अवैध रूप से मछली पकड़ने वालों को भी समझाकर नदी और पर्यावरण की सुरक्षा का संदेश देते हैं।
रविंद्र कुमार पशु-प्रेम के लिए भी जाने जाते हैं। यदि कहीं कोई घायल गाय या अन्य पशु दिखाई देता है तो सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर उसे अस्पताल पहुंचाने और उपचार कराने में भी पीछे नहीं हटते। चम्पावत के जिलाधिकारी मनीष कुमार भी रविंद्र कुमार के कार्यों की खुले दिल से सराहना करते हैं। उनका कहना है कि रविंद्र कुमार की सेवाएं अत्यंत विशिष्ट हैं और उन्हें ऐसे राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय सम्मान मिलने चाहिए, जिससे समाज के अन्य लोग भी प्रेरणा ले सकें। ईमानदारी भी रविंद्र कुमार की सबसे बड़ी पहचान है। पूर्णागिरि धाम और शारदा घाट पर स्नान के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा भूलवश छूटे मोबाइल फोन, नकदी, गहने और अन्य कीमती सामान उन्होंने हमेशा सुरक्षित उनके असली मालिकों तक पहुंचाए हैं। इससे कई परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई।
47 वर्षीय रविंद्र कुमार उर्फ ‘पहलवान’ का कहना है, “यदि मेरी वजह से किसी परेशान व्यक्ति की परेशानी दूर होती है, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।”
आज रविंद्र कुमार केवल एक पुलिसकर्मी नहीं, बल्कि मानवता, साहस, ईमानदारी और सेवा की ऐसी मिसाल हैं, जिन पर चम्पावत ही नहीं, पूरे उत्तराखंड को गर्व है।


फोटो_ शारदा घाट में दिल्ली से आए एक डूबते व्यक्ति की जान बचाने के बाद उसका आशीर्वाद लेते जल पुलिस के तैराक रविंद्र कुमार उर्फ ‘पहलवान’ तथा उनके सहयोगी पीआरडी जवान सूरज शर्मा।


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