मांगें पूरी न होने पर ओपीडी बहिष्कार, कार्य बहिष्कार और देहरादून में धरना-प्रदर्शन का ऐलान।
चंपावत। राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ के बैनर तले जिले के आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सकों ने सात सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन आज से शुरू कर दिया है। सोमवार से चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर सेवाएं देना शुरू कर दिया है। संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. गिरेंद्र चौहान और महामंत्री डॉ. सुधाकर गंगवार ने बताया कि 10 जून तक चिकित्सक काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। इसके बाद 11 जून आधे दिन ओपीडी का बहिष्कार किया जाएगा, 13 जून को पूर्ण कार्य बहिष्कार होगा तथा 15 जून से राज्य भर के चिकित्सक देहरादून में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में 10 वर्ष की सेवा के बाद एसीपी का लाभ, अन्य चिकित्सा संवर्गों के समान सुविधाएं, आयुर्वेद विभाग में चिकित्सक पृष्ठभूमि के निदेशक की नियुक्ति तथा विभागीय रिक्त पदों को शीघ्र भरना शामिल है। उनका कहना है कि स्टाफ की भारी कमी के कारण कई चिकित्सालय फार्मासिस्टों के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि कई स्थानों पर एकमात्र चिकित्सक पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल रहा है।
संघ पदाधिकारियों ने बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था को समाप्त करने और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो चिकित्सक अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए बाध्य होंगे। चिकित्सकों का यह आंदोलन ऐसे समय में शुरू हुआ है जब सभी आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी एवं पूरा स्टाफ विश्व पर्यावरण दिवस को मानने के लिए जीजान से जुटा हुआ है। इनकी सेवाओं को देखते हुए नागरिकों द्वारा भी इनकी मांगों का समर्थन किया जा रहा है।
फोटो – मांगों को लेकर आंदोलन की घोषणा करते संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. गिरेंद्र चौहान और महामंत्री डॉ. सुधाकर गंगवार।
चंपावत: काली पट्टी से शुरू हुआ आयुर्वेदिक चिकित्सकों का आंदोलन, हड़ताल की चेतावनी।

