

शालीन व्यवहार, अनुशासन और बेहतर शैक्षणिक माहौल को विद्यार्थियों ने बताया पहली प्राथमिकता।
लोहाघाट। स्वामी विवेकानंद राजकीय पीजी कॉलेज में छात्र संघ चुनाव को लेकर माहौल गरमाने लगा है। चुनावी मैदान में प्रत्याशियों की तैयारियां तेज हैं, वहीं छात्र मतदाताओं ने भी अपनी प्राथमिकताएं साफ कर दी हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि इस बार उन्हें ऐसा नेतृत्व चाहिए जो केवल पद हासिल करने तक सीमित न रहे, बल्कि कॉलेज की प्रतिष्ठा बढ़ाने और छात्र हितों के लिए पूरे साल सक्रिय रहे।
वर्ष 1979 में स्थापित यह महाविद्यालय करीब पांच दशक से क्षेत्र में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कॉलेज ने शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार, कर्तव्यबोध और राष्ट्र सेवा की भावना को आगे बढ़ाया है। यहां से शिक्षा लेकर निकले विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं। छात्रों की अपेक्षा है कि छात्र संघ भी कॉलेज की इसी गरिमा और पहचान को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाए।
सबसे कम उम्र में तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त करने वाली छात्रा शांभवी मुरारी का कहना है कि छात्र प्रतिनिधि की भाषा में शालीनता और व्यवहार में अनुशासन होना चाहिए। प्रशासन के साथ संवाद के दौरान उसके आचरण से कॉलेज की गरिमा दिखाई देनी चाहिए।
छात्र दीपक बोरा के अनुसार छात्र प्रतिनिधि को कॉलेज को नए ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने और परिसर में बेहतर अध्ययन का माहौल बनाने पर जोर देना चाहिए। उनका कहना है कि कॉलेज ऐसा हो, जहां दूसरे क्षेत्रों के विद्यार्थी भी पढ़ने के लिए आकर्षित हों और यहां से केवल डिग्री नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार लेकर जाएं।
मुकेश कुमार का कहना है कि छात्र नेतृत्व में स्वामी विवेकानंद के विचार आचरण में दिखाई देने चाहिए। युवाओं में अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने के लिए छात्र संघ को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
वहीं तनुजा डिक्टिया छात्र हितों को सबसे ऊपर रखती हैं। उनका कहना है कि छात्र प्रतिनिधि को पूरे वर्ष विद्यार्थियों के बीच सक्रिय रहकर उनकी समस्याओं को उठाना चाहिए और कॉलेज के गौरव को बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए।
छात्रों के मुताबिक छात्र राजनीति केवल चुनाव, पद और नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षा, अनुशासन, रचनात्मक गतिविधियों और छात्र समस्याओं के समाधान को छात्र संघ के कामकाज का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विद्यार्थियों की इच्छा है कि स्वामी विवेकानंद के नाम से जुड़े इस महाविद्यालय को प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल कराने के लिए सकारात्मक प्रयास हों।




