

श्लोक, नाटक, समूहगान और वाद-विवाद में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा- संस्कृत को जनजीवन से जोड़ने पर जोर
चंपावत। संस्कृत को केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति और रचनात्मकता से जोड़ने की पहल चंपावत में देखने को मिली। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित जनपद स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों से संस्कृत की समृद्ध परंपरा और भारतीय संस्कृति की झलक पेश की।
प्रतियोगिता में कनिष्ठ वर्ग के विद्यार्थियों ने श्लोकोच्चारण, आशुभाषण, संस्कृत नाटक, समूहगान, समूह नृत्य और संस्कृत वाद-विवाद में प्रतिभाग किया। मंच पर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और संस्कृत के प्रति उत्साह देखते ही बना। विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे प्रतिभागियों के बीच अलग-अलग विधाओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा रही।
मुख्य अतिथि आनंद सिंह अधिकारी के प्रतिनिधि रमेश चंद्र भट्ट ने कहा कि संस्कृत को विद्यालयी शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय इसे सामान्य जनजीवन और व्यवहार से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक स्तर से ही बच्चों में संस्कृत के प्रति रुचि विकसित करने से भाषा की परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य वासुदेव ओली ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को प्रतिभा प्रदर्शन के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर देती हैं। समापन अवसर पर सतीश चंद्र पाण्डेय ने कहा कि ऐसे आयोजन संस्कृत और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जनपद संयोजक वेद प्रकाश पंत ने आयोजन को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि सभी प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। आयोजन में सह संयोजक नवीन चंद्र जोशी, खंड संयोजक राजू शंकर जोशी, गोपाल पंतोला, पंचदेव पाण्डेय, संतोष तिवारी और पूर्व खंड संयोजक भगवान जोशी ने सहयोग किया।
प्रतियोगिताओं का संचालन हरीश चंद्र कलौनी, सतीश जोशी एवं जगदीश चंद्र जोशी ने किया। निर्णायक मंडल में राजू पंत, डीसी प्रभात पाण्डेय, डीसी महेश भट्ट, डॉ. भूप सिंह धामी, विद्या सागर लोहनी, ममता सोराड़ी, ओम प्रकाश जोशी, प्रशांत तिवारी एवं सतीश जोशी शामिल रहे।
आयोजन की व्यवस्थाओं और अभिलेखीकरण में रितेश वर्मा, भुवन चंद्र पंत, प्रकाश चंद्र उपाध्याय, हेमा जोशी, सुभाष गोस्वामी, डॉ. वाजश्रवा आर्य, पूजा शाह, नीरज जोशी, नरेंद्र गोस्वामी, रज्जन कफल्टिया, नीता लोहनी, डीसी नवीन सिंह बिष्ट और राखी गहतोड़ी सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया।
फोटो_ संस्कृत प्रतियोगिता में प्रस्तुति देते छात्र-छात्राएं।




