चंपावत में भाजपा संगठन मजबूत, दो और कार्यकर्ताओं को मिला राज्यमंत्री दर्जा।

Share This Post

मुकेश महराना बने चाय विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष, हेमा जोशी को महिला विकास बोर्ड में जिम्मेदारी; जिले में सम्मानित नेताओं की संख्या बढ़कर तीन।

चंपावत। भारतीय जनता पार्टी संगठन लगातार अपने समर्पित और जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मानित कर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंप रहा है। इसी क्रम में जिले के दो और सक्रिय कार्यकर्ताओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद अब ऐसे नेताओं की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। इससे पहले वरिष्ठ नेता श्याम नारायण पांडे को यह सम्मान मिल चुका है।
नवीन सूची में छात्र राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाले मुकेश महराना को चाय विकास बोर्ड का उपाध्यक्ष एवं दर्जा राज्य मंत्री नियुक्त किया गया है। महराना छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं और चंपावत पीजी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
मुकेश महराना की राजनीतिक पकड़ ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत मानी जाती है, जो उन्हें अपने स्वर्गीय पिता से विरासत में मिली है। वे पूर्व मंत्री बीना महराना के भतीजे हैं और चंपावत विधानसभा चुनाव में उनके प्रचार की कमान संभाल चुके हैं। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उपचुनाव में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
वहीं, भाजपा की महिला नेत्री हेमा जोशी को महिला विकास बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाकर पहली बार राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। हेमा जोशी लंबे समय से भाजपा से जुड़ी रही हैं और सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय रही हैं। उन्होंने मंडल अध्यक्ष से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और बाद में भाजपा जिला अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। उनकी सक्रियता और संगठन में योगदान को देखते हुए उन्हें प्रदेश स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण दायित्व दिए गए, जिनमें प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य के रूप में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है। वर्ष 2012 में उन्होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा था।
दोनों नेताओं को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद जिले में खुशी का माहौल है और समर्थकों द्वारा लगातार बधाई देने का सिलसिला जारी है। भाजपा संगठन का यह कदम जमीनी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और संगठन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वहीं, राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र को इस बार भी नजरअंदाज किया गया है। क्षेत्र को अब तक एक भी दर्जा राज्य मंत्री नहीं मिल पाया है, जिससे स्थानीय स्तर पर चर्चा और असंतोष की स्थिति भी देखने को मिल रही है।


Share This Post