चंपावत: लोहाघाट अस्पताल ने लौटाई मरीजों की उम्मीद: रेफरल पर लगी रोक, विशेषज्ञ डॉक्टरों से मिल रहा स्थानीय स्तर पर इलाज।

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सीएमओ डॉ. देवेश चौहान की पहल और डीएम मनीष कुमार की निगरानी का असर, अब चंदन लैब खुलने से जांच सुविधाएं भी होंगी सुदृढ़‌

लोहाघाट। कभी मामूली से गंभीर मामलों में भी मरीजों को हायर सेंटर रेफर किए जाने के लिए चर्चित रहने वाला उपजिला चिकित्सालय लोहाघाट अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता और प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी का परिणाम है कि अब अधिकांश मरीजों का उपचार स्थानीय स्तर पर ही किया जा रहा है और रेफरल की स्थिति लगभग समाप्त हो गई है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. देवेश चौहान द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के बाद जिला चिकित्सालय चंपावत और उपजिला चिकित्सालय लोहाघाट की व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए लगातार प्रयास किए गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सहयोग से दोनों अस्पतालों में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध कराए गए, जिससे मरीजों को अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं अपने जिले में ही मिल रही हैं।
जिलाधिकारी मनीष कुमार द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा और निरीक्षण किए जाने से चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में और सुधार आया है। वर्तमान में लोहाघाट अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ, दो फिजिशियन, नेत्र सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ तथा दो निश्चेतक चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि जनरल सर्जन का पद अभी भी रिक्त है, जबकि ईएनटी सर्जन उच्च अध्ययन के लिए राजस्थान गए हुए हैं।
अस्पताल में सबसे बड़ी चुनौती ओटी टेक्नीशियन और पैथोलॉजिस्ट के पदों की कमी बनी हुई है। ओटी टेक्नीशियन का पद स्वीकृत न होने से यह जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ निभा रहा है। वहीं पैथोलॉजी लैब और पैथोलॉजिस्ट की व्यवस्था न होने से अधिकांश जांचें चंदन लैब के माध्यम से कराई जा रही हैं, जिनकी रिपोर्ट हल्द्वानी से आने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है। इससे मरीजों के उपचार में अनावश्यक देरी होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों अस्पताल में उल्टी, दस्त और गैस्ट्रोएन्टराइटिस के मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। चिकित्सक उपचार तो कर रहे हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने से रोगों के वास्तविक कारणों का पता लगाने में कठिनाई हो रही है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि जिला चिकित्सालय चम्पावत और उपजिला चिकित्सालय लोहाघाट में शीघ्र ही चंदन लैब की स्थापना की जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी स्तर से पत्राचार किया जा चुका है तथा उनके स्तर से भी प्रस्ताव भेजा गया है। उधर उपजिला चिकित्सालय लोहाघाट के सीएमएस डॉ. विराज राठी का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने लगे तो दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही गंभीर रोगियों का उपचार भी अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। वर्तमान में मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए कम से कम तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं में आए इस बदलाव से सीमांत जनपद चम्पावत के लोगों का भरोसा सरकारी अस्पतालों पर लगातार बढ़ रहा है और लोहाघाट अस्पताल एक बार फिर क्षेत्र के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करता दिखाई दे रहा है।


फोटो – मरीजो का उपचार करते डॉ. जोशी।


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