लोहाघाट। पुलिस का काम केवल कानून व्यवस्था संभालना नहीं, बल्कि जरूरत के समय लोगों के लिए सहारा बनना भी होता है। लोहाघाट में तैनात ट्रैफिक पुलिस के जवान हेमचंद्र मेहरा ने अपनी कार्यशैली और मानवीय व्यवहार से लोगों के दिलों में ऐसी जगह बनाई है कि उनके तबादले के बाद स्थानीय लोगों और टैक्सी यूनियन ने उनकी सेवाएं लोहाघाट में ही बनाए रखने की मांग उठाई है।
हेमचंद्र मेहरा का हाल ही में लोहाघाट से ऊधम सिंह नगर में तबादला हुआ है। आमतौर पर दूसरे जनपद में तैनाती के लिए लोग प्रयास करते हैं, लेकिन मेहरा के तबादले पर क्षेत्र के लोगों में मायूसी है। उनका कहना है कि वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने पुलिस और टैक्सी संचालकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया और हमेशा आम जनता की मदद को प्राथमिकता दी। स्थानीय लोगों के अनुसार मेहरा केवल यातायात व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं रहे। सड़क पर मिले 34 हजार रुपये से भरे बैग को उसके वास्तविक मालिक तक सुरक्षित पहुंचाकर उन्होंने ईमानदारी की मिसाल पेश की। इसके अलावा बुजुर्गों और बीमार यात्रियों को रोडवेज बसों से उतरवाकर अस्पताल पहुंचाना, बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों से मिलाना और जरूरतमंदों की हरसंभव मदद करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।
लोग बताते हैं कि यदि उनके पैरों में दूरी नापने वाला मीटर लगा होता तो वह रोज़ाना पेट्रोल पंप से लेकर हिटलर मार्केट और डांग बंगला रोड तक तीस किलोमीटर पैदल चलकर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखते थे। उनकी सक्रियता के कारण यातायात संचालन में अनुशासन बना रहता था।
हेमचंद्र मेहरा को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। सेवानिवृत्ति में लगभग एक वर्ष शेष होने के बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कर्मठ और जनसेवा के प्रति समर्पित पुलिसकर्मी की सेवाएं लोहाघाट को मिलती रहनी चाहिए। कई लोगों ने उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक जैसे सम्मान के योग्य बताते हुए उनकी सेवाओं की सराहना की है।
फोटो – हेम चन्द्र मेहरा
चंपावत: लोहाघाट के ट्रैफिक जवान हेमचंद्र मेहरा के तबादले पर भावुक हुए लोग, सेवाएं जारी रखने की उठी मांग।
