चंपावत: सांगी पूजन के साथ गूंजा वाराही धाम, बग्वाल मेले के धार्मिक अनुष्ठानों का हुआ शुभारंभ।

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चार खाम-सात थोक के प्रतिनिधियों ने मां वज्र वाराही के चरणों में की सामूहिक पूजा, वेद ऋचाओं से गूंजा देवीधुरा।

देवीधुरा/चंपावत। विश्व प्रसिद्ध मां वज्र वाराही धाम में रविवार को सांगी पूजन के साथ ऐतिहासिक बग्वाल मेले की धार्मिक प्रक्रियाओं का विधिवत शुभारंभ हो गया। चार खाम और सात थोक के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर मां वज्र वाराही की पूजा-अर्चना की और विश्व कल्याण की कामना की। वैदिक मंत्रोच्चार और वेद ऋचाओं के सामूहिक गायन से पूरा वाराही धाम आध्यात्म और सनातन संस्कृति की दिव्य आभा में डूब गया।
सांगी पूजन की परंपरा वाराही धाम की प्राचीन धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार मुगल शासनकाल में मां वज्र वाराही की मूर्ति एवं उनका डोला ले जाया गया था। बाद में लमगड़िया खाम के वीरों ने उसे वापस लाकर सुरक्षित किया। सांगी (डोला) को लंबे समय तक कोटला में लमगड़िया खाम के प्रधान के यहां रखा गया और मेले के दौरान ही वाराही धाम लाया जाता था। अब डोले को रखने के लिए स्थायी व्यवस्था की गई है।

रविवार को आचार्य भुवन शास्त्री और आचार्य कीर्ति शास्त्री ने पूर्ण विधि-विधान के साथ सांगी पूजन संपन्न कराया। आचार्य गिरजाशंकर जोशी, ललित मोहन शास्त्री और हेम चंद्र जोशी ने पूजा-अर्चना में सहयोग किया।
पूजन में लमगड़िया खाम के प्रमुख वीरेंद्र लमगड़िया के प्रतिनिधि खीम सिंह लमगड़िया, गहड़वाल खाम के त्रिलोक सिंह बिष्ट के प्रतिनिधि राम सिंह बिष्ट, माधो सिंह, नंदन सिंह, चम्याल खाम के गंगा सिंह चम्याल, वालिग खाम के बद्री सिंह और दीवान सिंह समेत गुरना के महेश पुजारी, टकना के जगदीश चंद्र व हरीश चंद्र तथा फुलाराकोट के हीरा सिंह ने प्रतिभाग किया।
संस्कृत महाविद्यालय के भगवा वेशधारी छात्रों द्वारा वेदों की ऋचाओं के सामूहिक गायन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मां वाराही के जयकारों और वैदिक मंत्रों के बीच हुई इस पूजा के साथ ही देवीधुरा के ऐतिहासिक बग्वाल मेले से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया है।

फोटो_वाराही धाम में सांगी पूजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना करते आचार्य और चार खाम-सात थोक के प्रतिनिधि।


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