चंपावत: सीएम राहत कोष में गड़बड़ी का आरोप: नाम गायब, लाखों का भुगतान, खुलासा करने वाले को धमकियां।

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चंपावत में राहत राशि वितरण पर उठे सवाल, “अध्यक्ष” के नाम ₹2 लाख, ₹3 लाख बिना स्पष्ट पहचान मामला राज्यपाल तक पहुंचा।


चंपावत। उत्तराखंड के चंपावत जिले में मुख्यमंत्री राहत कोष के वितरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। राहत राशि के भुगतान में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चिराग फर्त्याल ने राहत कोष की सूची में संदिग्ध प्रविष्टियों का हवाला देते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार क्रमांक 409 पर ₹2 लाख “अध्यक्ष” के नाम जारी किए गए हैं, लेकिन संबंधित व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं है उसके नाम के आगे सिर्फ अंग्रेजी में नाम लिखा हुआ है। वहीं क्रमांक 871 पर ₹3 लाख की राशि दी गई, जिसमें लाभार्थी का नाम अधूरा और  स्पष्ट रूप में दर्ज है। फर्त्याल ने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अनियमितता का संकेत है और इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

इसी मामले को सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से उजागर होने के बाद “सबका विकास पार्टी” के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश शर्मा उर्फ नरेंद्र उत्तराखंडी ने आरोप लगाया है कि राहत कोष का लाभ जरूरतमंद गरीबों की बजाय प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को अधिक मिला है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी अधूरी और घुमावदार तरीके से उपलब्ध कराई गई, जिसे ठीक करने का अनुरोध किया गया है। नरेंद्र उत्तराखंडी का कहना है कि इस खुलासे के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं और गरीबों के हक की लड़ाई जारी रखेंगे। डॉ. शर्मा ने यह भी कहा कि यदि राहत राशि वास्तव में पात्र लोगों को दी जाती, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन वर्तमान स्थिति में सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे इस मामले को मुख्य सूचना आयुक्त और महामहिम राज्यपाल के संज्ञान में लाएंगे। इस संबंध में उन्होंने औपचारिक शिकायत पत्र भी भेज दिया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब इसकी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

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मामला उजागर होने के बाद आरोप प्रत्यारोप तो लग रहे, लेकिन “अग्निपरीक्षा” देने को नहीं है कोई तैयार।

चंपावत। सीएम द्वारा दी गई राहत सहायता की पोटली की गांठ खुलने के बाद हर जगह घर-घर में इसकी गर्म चर्चाएं हो रही है। लोग अपने-अपने अंदाज से भाजपा नेताओं का नाम ले रहे हैं क्योंकि सूची न केवल अस्पष्ट है बल्कि गुमराह करने वाली है। केवल अध्यक्ष लिखे जाने से उस व्यक्ति के दिमाक की दाद देनी होगी जिसने खुद को बचाने के लिए सभी अध्यक्षों को लपेटे मे ले लिया है। अपने को बेगुनाह साबित करने के दावे किए जा रहे है, लेकिन कोई ऐसा दावा नहीं कर रहा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो वे “अपना पद व पार्टी दोनों छोड़ देंगे”। लोग उस बाबू और उस अधिकारी के विरुद्ध भी कार्यवाही करने की जोरदार मांग कर रहे है जिसने RTI की धुंधली जानकारी दी है और उस पर संबंधित अधिकारी ने अपने हस्ताक्षर किए है। इससे स्पष्ट होता है कि संबंधित बाबू और अधिकारी आरोपियों के अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रहे है।

फोटो_ चिराग फर्त्याल एवं हरीश शर्मा उर्फ नरेंद्र उत्तराखंडी।


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