

100 पाठ और महाहवन के साथ क्षेत्र की सुख-शांति व लोकमंगल की कामना।
खेतीखान। करीब 15 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद खेतीखान में शतचंडी महायज्ञ का आयोजन हुआ। दस पुरोहितों ने विधि-विधान से दुर्गा सप्तशती के 100 पाठ कराए और महाहवन संपन्न कराया। श्रद्धालुओं ने यज्ञकुंड में आहुतियां देकर क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के साथ प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा की कामना की।
कर्मकांड के मर्मज्ञ प्रकाश पांडेय के मार्गदर्शन और उपस्थिति में हुए महायज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। हवन की सुगंध और मंत्रों के बीच श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से क्षेत्र, समाज और जन-जन के कल्याण की प्रार्थना की।

सनातन परंपरा में शतचंडी महायज्ञ को शक्ति आराधना का महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। दुर्गा सप्तशती के पाठ और हवन के माध्यम से देवी के चंडी स्वरूप की आराधना कर लोकमंगल, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इससे पूर्व शिक्षक गिरीश गहतोड़ी के प्रयासों से फटकशिला मंदिर गहतोड़ा में शतचंडी यज्ञ आयोजित हुआ था। करीब डेढ़ दशक बाद खेतीखान में दोबारा हुए इस आयोजन को लोगों ने क्षेत्र की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के पुनर्जीवन के रूप में देखा।
महायज्ञ में खेतीखान के रिंकू स्वीट्स के संचालक पवन ओली मुख्य यजमान रहे। समापन पर श्रद्धालुओं ने सामूहिक प्रार्थना कर क्षेत्र और समाज के मंगल की कामना की।
लंबे अंतराल के बाद हुए इस आयोजन से खेतीखान की धार्मिक स्मृतियां फिर जीवंत हो उठीं। आयोजन ने सामूहिक आस्था, सहभागिता और लोककल्याण की भावना को भी मजबूत किया।
फोटो_खेतीखान में शतचंडी महायज्ञ के दौरान यज्ञकुंड में आहुतियां अर्पित कर लोकमंगल की कामना करते श्रद्धालु।



