अतिक्रमण मुक्त सरकारी भूमि अभियान को मिली बड़ी सफलता, 358 विद्यालयों के भू-अभिलेख भी हुए दुरुस्त।
चंपावत। जनपद में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाने और राजकीय संस्थानों को उनके वैधानिक भू-अधिकार दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। शासन की स्वीकृति के बाद जनपद के 20 आंगनबाड़ी केंद्रों का विधिवत नामान्तरण कर उनकी भूमि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के नाम दर्ज कर दी गई है। इससे इन केंद्रों को पहली बार अपनी अधिकृत भूमि का अधिकार प्राप्त हुआ है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा एवं शासन के निर्देशों के अनुरूप जनपद में राजकीय भूमि को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में उन आंगनबाड़ी केंद्रों को चिन्हित किया गया, जिनके भवन तो संचालित हो रहे थे, लेकिन उनके नाम विभागीय भूमि दर्ज नहीं थी। जिला प्रशासन की पहल पर शासन द्वारा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के नाम निःशुल्क हस्तांतरण एवं नामान्तरण की स्वीकृति प्रदान की गई, जिसके बाद गुरुवार को विभिन्न विकासखंडों के 20 आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमि का विधिवत नामान्तरण कर आवश्यक अभिलेख विभाग को सौंप दिए गए।
इनमें विकासखंड चं के राकड़ीफुलारा, जूपपटवा, खर्ककार्की-1 एवं खर्ककार्की-2, विकासखंड लोहाघाट के नई बलाई, भूमलाई, रायकोट-2, डूंगरी पऊ, खेतकुनी, रोलधौन, खिलपति, डनगांव, डूंगाबोरा, मझेड़ा, झालनदेव, कोलीडेक और आगर-2 सहित विकासखंड बाराकोट के जिण्डी, लुवाकोट एवं लीवू आंगनबाड़ी केंद्र शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि अभियान के तहत अब तक जनपद के 358 विद्यालयों की भूमि को भी राजस्व अभिलेखों में पूरी तरह दुरुस्त किया जा चुका है। इससे भविष्य में किसी प्रकार के अतिक्रमण, भूमि विवाद अथवा स्वामित्व संबंधी समस्याओं से बचाव होगा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार ऐसे स्थानों को चिन्हित कर रहा है जहां अतिक्रमण की संभावना बनी रहती है। इन स्थानों पर समय रहते कार्रवाई कर सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने इस पहल को जनपद के लिए अत्यंत सकारात्मक बताते हुए कहा कि भविष्य में भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
फोटो – जिलाधिकारी मनीष कुमार।
चंपावत: 20 आंगनबाड़ी केंद्रों को मिली अपनी जमीन, प्रशासन ने कराया विधिवत नामान्तरण।

