पांच साल से फाइलों में कैद है लोहाघाट अस्पताल का प्रस्ताव, रिकॉर्ड ओपीडी और बढ़ते मरीजों के दबाव के बीच फिर जगी उम्मीद।
लोहाघाट। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मॉडल जिला चंपावत’ के बीच लोहाघाट अस्पताल अपनी पहचान और सुविधाओं के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहा है। अस्पताल के मुख्य द्वार पर भले ही ‘उप जिला चिकित्सालय’ (एसडीएच) का बोर्ड लगा हो, लेकिन सरकारी अभिलेखों और बजट के हिसाब से यह आज भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में ही संचालित हो रहा है। जिले के तीन विकासखंडों के अलावा नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों तथा पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और नैनीताल जनपदों के हजारों लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या के बावजूद अस्पताल को अब तक उप जिला चिकित्सालय का दर्जा नहीं मिल पाया है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में अस्पताल को एसडीएच का दर्जा देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बाद मामला स्वास्थ्य महानिदेशालय में लंबित रह गया। इस दौरान अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती रही और संसाधनों पर दबाव भी बढ़ता चला गया।
वर्तमान में अस्पताल में नौ विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ चार अन्य चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। प्रतिदिन 30 से 35 मरीज भर्ती किए जा रहे हैं, जबकि ओपीडी में भी रिकॉर्ड संख्या में मरीज पहुंच रही है। हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग और बाल रोग विभाग में मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल की व्यवस्थाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि हजारों लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा संभालने वाला यह अस्पताल आज भी महज 15 से 16 लाख रुपये के वार्षिक बजट पर संचालित हो रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद अस्पताल प्रशासन मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, ताकि उन्हें अन्य अस्पतालों में रेफर न करना पड़े।

मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर 56 पृष्ठों का नया प्रस्ताव स्वास्थ्य महानिदेशालय को भेज दिया है। इसके बाद क्षेत्र के लोगों को एक बार फिर उम्मीद जगी है कि वर्षों से लंबित यह मांग जल्द पूरी हो सकती है।
बॉक्स_
क्या बोले अधिकारी_
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विराज राठी ने बताया कि मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल पर दबाव काफी बढ़ गया है। इस संबंध में पूरी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने कहा कि लोहाघाट अस्पताल को उप जिला चिकित्सालय का दर्जा दिलाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए प्रस्ताव महानिदेशालय को भेज दिया गया है।
फोटो_लोहाघाट अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगा ‘उप जिला चिकित्सालय’ का बोर्ड।
