

3 सितंबर से ऐड़ी-बालकृष्ण मेले का आगाज, जन्माष्टमी पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा।
देवीधुरा के व्यापारियों के पहुंचने से बाजार में लौटी रौनक।
लोहाघाट। देवीधुरा की ऐतिहासिक डोला यात्रा के बाद अब लधियाघाटी का भिगराड़ा ऐड़ी देवता की भक्ति में रंगने को तैयार है। 3 सितंबर से शुरू होने वाला तीन दिवसीय ऐड़ी-बालकृष्ण मेला क्षेत्र में आस्था और उल्लास का माहौल बनाएगा। जन्माष्टमी के दिन 4 सितंबर को भगवान बालकृष्ण और ऐड़ी देवता की भव्य शोभायात्रा निकलेगी। मेले को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है और तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं।
मेले की आहट के साथ ही भिगराड़ा बाजार में चहल-पहल बढ़ गई है। देवीधुरा से पहुंचे व्यापारियों ने दुकानें सजानी शुरू कर दी हैं। लधियाघाटी के अलावा नैनीताल जिले से लगे गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
1980 से चली आ रही परंपरा, आज बना क्षेत्र की पहचान_
भिगराड़ा का ऐड़ी-बालकृष्ण मेला वर्ष 1980 में समाजसेवी घनश्याम भट्ट और तत्कालीन रेंजर बालकृष्ण की पहल से शुरू हुआ था। शुरुआती आयोजन में उमड़ी भीड़ ने इसकी लोकप्रियता का अंदाजा करा दिया था। समय के साथ मेले ने विस्तार लिया और तीन दिवसीय आयोजन की परंपरा कायम हो गई।
स्थानीय लोग मेले को पांच दिन तक आयोजित करने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन सीमित स्थान और संसाधनों के चलते अभी तीन दिन का ही आयोजन हो रहा है।
जागरण से शोभायात्रा तक, हर रंग में दिखेगी लोकसंस्कृति
मेले में धार्मिक आयोजनों के साथ पहाड़ की पारंपरिक संस्कृति भी जीवंत होगी। झोड़ा, चांचरी और न्योली की प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। 3 सितंबर की रात ऐड़ी देवता का जागरण होगा। वहीं 4 सितंबर को जन्माष्टमी पर दो स्थानों से भगवान बालकृष्ण और ऐड़ी देवता की शोभायात्राएं निकाली जाएंगी।
मेले की व्यवस्थाओं की कमान इस बार युवाओं और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संभाली है। रमेश भट्ट, चंद्रशेखर जोशी, कृष्णानंद भट्ट, दिनेश भट्ट, धर्मानंद भट्ट, कमल भट्ट, शिवदत्त भट्ट और दीपक शर्मा समेत कई लोग तैयारियों में जुटे हैं। मेला समिति अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी मुकेश महराना को दर्जा राज्यमंत्री का सम्मान प्राप्त होने से इस बार आयोजन को लेकर लोगों की उम्मीदें और बढ़ी हैं।
फोटो_ जन्माष्टमी मेले के लिए सजकर तैयार भिगराड़ा का प्रसिद्ध ऐड़ी मंदिर।




