

डॉ.कीर्तिबल्लभ शक्टा बने उत्तराखंड भाषा संस्थान की सामान्य सभा के सदस्य।
चंपावत। पहाड़ की लोकभाषा को अब राज्यस्तर पर अपनी आवाज मिल गई है। उत्तराखंड भाषा संस्थान की सामान्य सभा में पहली बार चंपावत को औपचारिक प्रतिनिधित्व मिला है। उत्तराखंड शासन के भाषा विभाग की ओर से 27 अगस्त 2026 को जारी शासनादेश के तहत चंपावत के साहित्यकार डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा को उत्तराखंड की लोकभाषा के साहित्यकार के रूप में सामान्य सभा का सदस्य नामित किया गया है।
यह नामांकन केवल एक साहित्यकार का सम्मान नहीं, बल्कि चंपावत की समृद्ध लोकभाषायी और सांस्कृतिक विरासत को राज्यस्तरीय संस्थागत मंच मिलने की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लोकगीतों, लोककथाओं, लोकगाथाओं, कहावतों और कुमाऊंनी सहित विविध भाषायी परंपराओं से समृद्ध चंपावत की आवाज अब प्रदेश के भाषा संबंधी विमर्श और नीतिगत मंच तक पहुंचेगी।
लोकभाषा के संरक्षण की बढ़ी उम्मीद
बदलते दौर में नई पीढ़ी का अपनी लोकभाषाओं से जुड़ाव लगातार कमजोर हो रहा है। ऐसे समय में लोकभाषाओं को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय उनके शोध, दस्तावेजीकरण, प्रकाशन और डिजिटल अभिलेखीकरण पर जोर देने की जरूरत है। चंपावत जैसे सीमांत जिले में लोकसाहित्य का बड़ा हिस्सा आज भी मौखिक परंपरा में सुरक्षित है। समय रहते इसे दर्ज नहीं किया गया तो अनेक लोकशब्द, लोककथाएं और लोकपरंपराएं आने वाली पीढ़ियों की स्मृति से गायब हो सकती हैं।
डॉ. शक्टा के नामांकन से साहित्य और लोकभाषा जगत में उत्साह है। उम्मीद है कि सामान्य सभा में उनकी मौजूदगी के जरिए चंपावत और कुमाऊं की उन साहित्यिक एवं लोकभाषायी आवाजों को व्यापक मंच मिलेगा, जो लंबे समय से अपनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रयासरत हैं।
डॉ. शक्टा को मिली जिम्मेदारी के साथ अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चंपावत की लोकभाषा के संरक्षण के लिए राज्यस्तर पर कितनी ठोस पहल होती है। लोकभाषाओं को शोध, प्रकाशन, डिजिटल रिकॉर्ड, शिक्षण और युवा पीढ़ी से जोड़ने की योजनाएं धरातल पर उतरती हैं तो यह प्रतिनिधित्व महज एक सरकारी आदेश तक सीमित नहीं रहेगा।
चंपावत के लिए यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पहली बार जिले की लोकभाषायी पहचान को राज्य के औपचारिक भाषा संस्थान में जगह मिली है। अब चंपावत की बोली की आवाज सिर्फ पहाड़ की घाटियों तक नहीं, बल्कि राज्य के भाषायी मंच तक पहुंचेगी।
फोटो_उत्तराखंड भाषा संस्थान की सामान्य सभा के सदस्य नामित किए गए चंपावत के साहित्यकार डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा।




