

बालेश्वर धाम से नागनाथ मंदिर तक निकली भव्य डोला यात्रा, ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा से भक्तिमय हुआ माहौल।
चंपावत। पहाड़ों की शांत वादियां सोमवार को मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से गूंज उठीं। नंदा-सुनंदा महोत्सव के तहत प्राचीन बालेश्वर धाम से मां नंदा-सुनंदा का डोला उठा तो आस्था का सैलाब सड़कों पर उतर आया। मुख्य बाजार से होते हुए नागनाथ मंदिर तक निकली डोला यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

पर्वतीय हवाओं के बीच ढोल-नगाड़ों की थाप और देवी के जयकारों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। डोले के आगे बढ़ते ही जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर मां का स्वागत किया। महिलाएं, पुरुष और युवा पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए। दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी डोले के दर्शन कर मां का आशीर्वाद लिया।
डोला यात्रा में शामिल आकर्षक झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा। पारंपरिक वेशभूषा, लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को दर्शाती झांकियों ने पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत तस्वीर पेश की। देव डंगरियों के आशीर्वाद और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनी।
वर्ष 2007 में शुरू हुआ नंदा-सुनंदा महोत्सव आज चंपावत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है। हर वर्ष महोत्सव में बढ़ती श्रद्धालुओं की भागीदारी इसकी गहरी आस्था और परंपरा से जुड़ाव को दर्शाती है।
फोटो_मां नंदा-सुनंदा के डोले के साथ जयकारे लगाते श्रद्धालु।



