

पर्यटन, बागवानी, डेयरी और मौनपालन से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय, फोन-व्हाट्सएप पर भी सुनी जाएंगी समस्याएं
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे दूरस्थ गांवों की तस्वीर बदलने और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने सीमांत क्षेत्रों का सघन भ्रमण कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (CMBADP) के तहत विकास एवं रोजगार की संभावनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
डीएम ने कहा कि टनकपुर-जौलजीबी सड़क बनने से सीमांत क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही बागवानी, कृषि, मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन, मौनपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर ग्रामीणों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात एसएसबी की जरूरतों के अनुरूप स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
नगरूघाट में एंग्लिंग सेंटर और होमस्टे विकसित कर स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोड़ने की योजना है। नागार्जुन मंदिर का सौंदर्यीकरण करने के साथ मुख्य द्वार से मंदिर तक पैदल मार्ग और सोलर लाइटें लगाई जाएंगी। जीआईसी रौशाल में विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित करने और भवनों की मरम्मत की योजना है। वहीं, पासम-बलोटा से नगरूघाट तक 13 किलोमीटर सड़क की स्थिति सुधारने के लिए पीएमजीएसवाई को निर्देश दिए जाएंगे। असलाड़ गांव में गौशाला स्थापित करने की भी योजना है।
डीएम ने कहा कि घाटी क्षेत्र में आम, अमरूद, लीची, कटहल, केला और सिट्रस फलों की खेती की व्यापक संभावनाएं हैं। आधुनिक तकनीक से मौनपालन को बढ़ावा देकर कृषि और बागवानी की उत्पादकता बढ़ाई जाएगी। नगरूघाट के सिंचाई से वंचित क्षेत्रों में पाइपों के जरिए पानी पहुंचाने तथा पासम, नकेला, मटियानी और सुल्ला में मडुवा उत्पादन का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों को डेयरी विभाग की योजनाओं से जोड़कर उन्नत नस्ल की दुधारू गाय उपलब्ध कराने के प्रयास होंगे। दूध की खपत का सर्वे कर सुविधाजनक स्थानों पर डेयरी स्थापित करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बिक्री की सुविधा मिल सके।
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मुख्यालय आए बिना बताएं समस्याएं_
जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से कहा कि समस्याओं को लेकर जिला मुख्यालय आने के बजाय फोन या व्हाट्सएप के माध्यम से प्रशासन को जानकारी दें। इससे उनका समय और धन बचेगा। प्रशासन समस्याओं को संज्ञान में लेकर समाधान की दिशा में कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनसे ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के साथ रोजगार भी मिल सके।
डीएम के दौरे और उनके सहज व्यवहार की क्षेत्र में चर्चा हो रही है। चंद्रकांत तिवारी, ग्राम प्रधान मोहन सिंह, त्रिलोक सिंह सामंत, प्रकाश सामंत और हेमचंद्र सहित अन्य ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
फोटो_ जिलाधिकारी मनीष कुमार।




